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विचार

opinion

भूत-प्रेत की कहानियों से शुरू हुआ अंधविश्वास का जाल

बचपन में बड़े बुजुर्ग अक्सर भूतों से उनके साथ हुई घटनाओं के किस्से सुना महफ़िल लूट लिया करते थे, जिनमें उनका भूतों के साथ बीड़ी पीना आम बात थी और कई बार वो भूतों को हड़का भी देते थे, तब साथ वाले उनके साथी बुजुर्ग उनसे भी भयंकर वाला किस्सा…
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अपमान से आत्मगौरव तक: मोदी युग में बदला भारत !

1965 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी को अमेरिका के राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने अमरीका आने का एक आधिकारिक निमंत्रण भेजा था। शास्त्री जी विदेश यात्रा पर थे, वहीं से अमेरिका जाने की योजना थी, पर रास्ते में ही अचानक…
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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: स्वस्थ जीवन का ‘योग सूत्र’

योग की उत्पत्ति हजारों साल पहले भारत में हुई। इसे प्राचीन भारतीय ग्रंथों जैसे वेदों, उपनिषदों, और भगवद्गीता में वर्णित किया गया है। योग का सबसे प्राचीन उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है, जो लगभग 5000 वर्ष पुराना है। हालांकि, योग को व्यवस्थित…
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विश्व योग दिवस पर विशेष: साइनस का रामबाण है सूत्र नेति – डॉ. रमेश कुमार

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक योग शिविर के आज अंतिम दिन योग विशेषज्ञ के रूप में विश्व योग चैंपियन डॉ. रमेश कुमार योगाचार्य, प्रोफेसर, योग विज्ञान विभाग, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई…
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जाति जनगणना : सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देना

जाति जनगणना दशकों से निष्क्रिय रही है, जो अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों तक ही सीमित है। बिहार जाति जनगणना के बाद, एक व्यापक राष्ट्रीय जाति जनगणना की मांग एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दे के रूप में उभरी है। राजनीतिक स्पेक्ट्रम के पार से…
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काश एक राहुल गांधी हमारे दुश्मन पाकिस्तान को भी मिले!

प्रो. विधु रावलभारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर ने सिर्फ़ पाकिस्तान और PoK के आतंकी ठिकानों और विभिन्न पाकिस्तानी एयरबेस को ही मिट्टी में नहीं मिलाया बल्कि पाकिस्तान की इज़्ज़त की भी धज्जियाँ उड़ा दी और पाकिस्तान की साख भी उसी राख में…
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स्वर्णिम अतीत से स्वावलंबन तक: भारत का वैभवपथ

प्रो. विधु रावलजो लोग यह कहकर भारत का उपहास उड़ाते हैं कि “1947 से पहले भारत में सुई तक नहीं बनती थी”, उन्हें इतिहास के उन धुंधलाए पन्नों को फिर से पढ़ना चाहिए, जिन पर आज भी भारत की गौरवगाथा अमिट अक्षरों में अंकित है। भारत वह भूमि है…
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युद्ध केवल शस्त्रों की गर्जना नहीं, पुरुषार्थ का श्रृंगार है: प्रो. विधु रावल

युद्ध केवल रक्त गाथा नहीं है, यह आत्मसम्मान की अग्निपरीक्षा है। जब शत्रु सिंहनाद करता है, तो वीर राष्ट्रों के लिए वह अरण्य नहीं, उत्सव बन जाता है। युद्ध केवल शस्त्रों की गर्जना नहीं है, यह आत्मा के भीतर जलती उस अग्नि का नाम है, जो अन्याय के…
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युद्ध और मीडिया: एक जिम्मेदार दृष्टिकोण की आवश्यकता

युद्ध उत्सव नहीं, एक भयानक त्रासदी है। जब हम अपने घरों में सुरक्षित बैठे हैं, तब इसे त्योहार की तरह केवल वही लोग देख पा रहे हैं, जिनके परिवार का कोई सदस्य सेना में नहीं है। युद्ध की वास्तविकता उन परिवारों के लिए कितनी भयावह होती है, जिनके…
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अमरीका से भारत के लोकतंत्र पर हमला, राहुल गांधी की सामन्तवादी हताशा का प्रतीक: प्रो. विधु रावल

राहुल गांधी ने अमेरिका की प्रतिष्ठित ब्राउन यूनिवर्सिटी में भारत के निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाये हैं। यह कोई पहली घटना नहीं है जब उन्होंने विदेशी धरती पर भारत की संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया हो। यह…
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