विश्व योग दिवस पर विशेष: साइनस का रामबाण है सूत्र नेति – डॉ. रमेश कुमार

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक योग शिविर के आज अंतिम दिन योग विशेषज्ञ के रूप में विश्व योग चैंपियन डॉ. रमेश कुमार योगाचार्य, प्रोफेसर, योग विज्ञान विभाग, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने सभी प्रतिभागियों को जलनेति और सूत्र नेति का अभ्यास कराया। योगाभ्यास करवाते हुए उन्होंने कहा जल नेति और सूत्र नेति साइनस के लिए रामबाण है, यदि प्रतिदिन हम सूत्र नेति करते हैं तो साइनस की प्रॉब्लम हो या नाक की हड्डी बढ़ने की समस्या या साइनोसाइटिस हो गई हो उन सबका समाधान जल नेति और सूत्र नेति के द्वारा किया जा सकता है।

जल नेति – इसका अभ्यास सामान्य रूप से सभी लोग कर सकते हैं। अभ्यास के लिए एक जल नेति का लोटा और उसमें गुनगुना पानी नमक स्वाद के अनुसार मिला कर कागासन में बैठ जाएं और जिस नासिका में श्वास ज्यादा चल रहा हो उस नासिका में जल नेति के लोटे की नाल को लगा दें और धीरे-धीरे सिर को आगे झुकाते हुए जल नेति के पोट को ऊपर उठाएं और आप देखेंगे कि धीरे-धीरे आपका पानी दूसरी नासिका से आने लगा है। ध्यान रहे अभ्यास करते हुए मुंह खुला रहे और श्वास मुख से ही लें। इससे नासिका में जमा हुआ श्लेष्मा धीरे-धीरे गीला होकर नरम हो जाता है, इसके बाद सूत्र नेति करेंगे जमा हुए म्यूकस को हम बाहर निकाल सकते हैं। सूत्र नेति- में एक सूत की रस्सी होती है उस रस्सी में जिस तरफ से मोम लगा होता है उस तरफ से नासिका में धीरे-धीरे डालेंगे और मुख में आने पर प्रथम दो उंगलियों को मुख में डाल कर उसको बाहर निकाल लेंगे और फिर उसका घर्षण करें इसी प्रकार दूसरी नासिका से करें। इसे सूत्र नेति कहते हैं। इसके द्वारा जमा हुआ श्लेष्मा बाहर आ जाता है जिससे साइनस की प्रॉब्लम, नाक बढ़ी हुई हड्डी या मांस धीरे-धीरे घर्षण के द्वारा समाप्त हो जाता है।

लाभ- जल नेति एवं सूत्र नेति का अभ्यास साइनस, नाक में बढ़ा हुआ मांस या हड्डी, साइनोसाइटिस के साथ साथ खर्राटे लेना, नींद ना आना, सर में दर्द रहना, बालों का पकना या झड़ना, माइग्रेन या मानसिक तनाव आदि अनेक समस्याओं से निजात दिलाता है इसका अभ्यास प्रतिदिन किया जा सकता है।

सावधानियां- किसी प्रकार का कोई ऑपरेशन हो वह इसे ना करें। इसके करने से पूर्व नाक के अंदर गाय का घी या बादाम का तेल दो-दो बूंद जरूर डालें और क्रिया करने के बाद भी डालें तथा भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास जरूर करें। यह क्रिया किसी योग विशेषज्ञ के मार्ग निर्देशन में ही करें।

संस्था के महासचिव अनिल बाल्याण ने कल विश्व योग दिवस के उपलक्ष्य में सभी को बढ़ चढ़कर भाग लेने का आग्रह किया

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