काश एक राहुल गांधी हमारे दुश्मन पाकिस्तान को भी मिले!

प्रो. विधु रावल

भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर ने सिर्फ़ पाकिस्तान और PoK के आतंकी ठिकानों और विभिन्न पाकिस्तानी एयरबेस को ही मिट्टी में नहीं मिलाया बल्कि पाकिस्तान की इज़्ज़त की भी धज्जियाँ उड़ा दी और पाकिस्तान की साख भी उसी राख में तब्दील हो गई, जिसमें उनके आतंकी सपने जल कर खाक हो चुके थे। इन धमाकों की गूँज इस्लामाबाद से लेकर राहुल गांधी के दिमाग तक सुनाई दी। ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता से भारत का मस्तक गर्व से ऊँचा हुआ है, वहीं दो जगह पूरी तरह मातम छाया था: एक पाकिस्तान, जिसके आतंकी सपने चकनाचूर हो गए और दूसरा, राहुल गांधी का दिल, जो भारत की इस शानदार जीत से जलन की आग में जल रहा है।

भारत के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता को देखकर ऐसा मुँह बनाया, मानो कोई बच्चा अपनी पसंदीदा आइसक्रीम छिन जाने पर बनाता है। राहुल का टेप रिकॉर्डर लगातार चालू है कि “भारत ने कितने एयरक्राफ्ट खोए?” उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी भारत की सेना के साथ साथ प्रधानमंत्री मोदी जी को नीचा दिखाने का मौका कभी नहीं चूकते। इस बार भी राहुल गांधी ने भारत की जीत को फीका करने और पाकिस्तान को खुश करने के प्रयासों में जुटे हैं ! पाकिस्तानी मीडिया चैनल जियो न्यूज़, डॉन और ऐअरवाई के दफ़्तरों में राहुल गांधी के बयानों की कटिंग फ्रेम करके टांगी जा रही है मानो पूरा पाकिस्तान राहुल गांधी को पाकिस्तान का सर्वोच्च सैन्य पुरस्कार “निशान-ए-हैदर” देने की तैयारी में हो!

राहुल जी का दुख इतना गहरा है कि वो भारतीय सेना की वीरता की तारीफ तक नहीं कर पाए जबकि उनकी अपनी पार्टी के नेता शशि थरूर, सलमान खुर्शीद और मनीष तिवारी तक ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता का डंका दुनिया भर में बजा रहे हैं। राहुल गांधी की जलन इतनी तीखी है कि अगर इसे बोतल में भरकर बेचा जाए, तो हर पाकिस्तानी उसे शोंक से गटक ले।

सोचिए, अगर राहुल गांधी पाकिस्तान के नेता प्रतिपक्ष होते, तो वहाँ की नेशनल असेंबली में क्या तमाशा होता? वो खड़े होकर कहते, “भारत के दो दर्जन हमले पाकिस्तानी डिफेंस सिस्टम क्यों नहीं रोके गए?” और पाकिस्तानी सेना जो पहले ही ऑपरेशन सिंदूर में अपने आतंकी नायकों के जनाजे में रो रही थी, शायद सामूहिक आत्महत्या पर मजबूर हो जाती!

राहुल गांधी की बयानबाजी ने पाकिस्तान को इतना मसाला दे दिया कि वो इन्ही बयानों को आधार बनाकर भारत के खिलाफ UN में मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। समझना मुश्किल है कि राहुल गांधी भारत के नेता हैं या पाकिस्तान के प्यादे? मोदी जी और भारत की हर सफलता राहुल गांधी के दिल में तीर की तरह चुभती है। ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी ने तो जैसे उनके सीने में जलन का ज्वालामुखी फोड़ दिया है।

काश, राहुल गांधी सचमुच पाकिस्तान चले जाएँ! वहाँ वो सवालों से पाकिस्तानी सेना का मनोबल इतना तोड़ दें कि पाकिस्तानी सेना खुद कहे कि बस, अब और आतंकी अड्डे नहीं बनाएँगे! और राहुल गांधी के ग़द्दारी भरे बयान सुन शायद ईएमएफ़ और वर्ल्ड बैंक भी पाकिस्तान को कर्ज देना बंद कर दे!

राहुल गांधी जैसा नेता जिस देश में हो, उसे दुश्मनों की कमी महसूस नहीं होती। राहुल गांधी का दुख, जलन और मोदी-विरोधी राग इतना तीखा है कि इसे सुनकर पाकिस्तान भी शर्म से पानी हो जाए। काश, आपकी ये ग़द्दारी पाकिस्तान को मिले!

[संदर्भ- ऑपरेशन सिंदूर में भारत और भारतीय सेना की ऐतिहासिक सफलता को फीका करने के प्रयास में राहुल गांधी के शर्मनाक बयान]

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