कम उम्र में गठिया और चोट का समय पर इलाज जरूरी : डॉ. राकेश कुमार

फरीदाबाद। कार्टिलेज की समस्या में आधुनिक तकनीक से घुटने का प्रत्यारोपण टालना संभव है कम उम्र में होने वाली घुटने की बीमारी और गंभीर चोट का समय पर इलाज कराने से मरीज को लंबे समय तक राहत मिल सकती है। आधुनिक तकनीकों की मदद से घुटने की कार्यक्षमता को बनाए रखने के साथ-साथ भविष्य में होने वाले घुटना प्रत्यारोपण को भी टाला जा सकता है। यह जानकारी ग्रेटर फरीदाबाद स्थित एकॉर्ड अस्पताल के ऑर्थो एवं ज्वाइंट रिप्लेसमेंट स्पोट्र्स इंजरी विभाग के निदेशक डॉ. राकेश  कुमार ने शनिवार को नीलम बाटा रोड स्थित एक होटल में आयोजित सेमिनार में दी। कई बार कम उम्र, करीब 40 वर्ष में ही मरीजों को घुटने में गठिया की समस्या होने लगती है। ऐसे मरीजों में समय पर उचित प्रक्रिया और उपचार किया जाए तो घुटने की कार्यक्षमता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिल सकती है। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में आधुनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से घुटने की लाइफ को करीब 10 से 15 साल तक बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि युवा मरीजों में यदि कार्टिलेज में खराबी या डिफेक्ट है तो उसके लिए भी आधुनिक उपचार तकनीक उपलब्ध हैं।

ऑटोलॉगस कार्टिलेज तकनीक और बोन-आधारित प्रक्रियाओं की मदद से खराब कार्टिलेज वाले हिस्से को ठीक करने का प्रयास किया जाता है। इससे घुटने के प्रत्यारोपण की जरूरत को कई वर्षों तक टाला जा सकता है और कुछ मरीजों में प्रत्यारोपण से बचने की संभावना भी रहती है। डॉ. कुमार ने गंभीर चोटों के मामले में समय पर उपचार को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ज्वाइंट फ्रैक्चर या कंपाउंड फ्रैक्चर में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे मामलों में करीब छह घंटे का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस अवधि में घाव और जोड़ की अच्छी तरह सफाई (लैवेज) कर उचित तरीके से फ्रैक्चर को ठीक करने की प्रक्रिया की जाए तो संक्रमण, जोड़ में अकडऩ और आगे चलकर गठिया जैसी समस्याओं का खतरा कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गंभीर चोट के मामलों में गोल्डन पीरियड के भीतर सर्जरी बेहद जरूरी है।

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