हरित, समृद्ध, औद्योगिक और डिजिटल क्रांति का अग्रदूत हरियाणा
हरियाणा दिवस पर 10 प्रमुख क्षेत्रों में प्रदेश की प्रगति का विश्लेषण
हरियाणा के सभी 22 जिलों में लगने वाले स्वदेशी मेलों से नवाचार और उद्यमिता में होगी बढ़ोतरी
हरियाणा दिवस केवल एक राज्य स्थापना दिवस नहीं, बल्कि उस मेहनतकश भूमि का उत्सव है जिसने भारत को अनाज, खिलाड़ी, सैनिक, और प्रगतिशील नागरिक दिए हैं। आने वाले वर्षों में “हरित, समृद्ध और डिजिटल हरियाणा” का सपना निश्चित रूप से साकार होगा।
हरियाणा राज्य का गठन 1 नवंबर 1966 को पंजाब से अलग कर किया गया था। भौगोलिक रूप से छोटा होने के बावजूद हरियाणा ने पिछले पाँच दशकों में सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, औद्योगिक, खेलकूद और कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज हरियाणा देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों में गिना जाता है। आइए, हरियाणा दिवस के अवसर पर राज्य की विभिन्न क्षेत्रों में हुई उपलब्धियों का आंकड़ों सहित अवलोकन करें।
1. सांस्कृतिक प्रगति: हरियाणा की संस्कृति भारतीय सभ्यता की आत्मा को प्रतिबिंबित करती है। यहाँ के लोकगीत, रागनियाँ, नृत्य और पारंपरिक मेलों की प्रसिद्धि देश-विदेश तक फैली हुई है। ‘फाग’, ‘हरियाली तीज’, ‘सावन’, गीता उत्सव, सूरजकुंड मेला ,‘गोगा नवमी’ जैसे पर्व हरियाणवी उत्सव लोकजीवन के अभिन्न अंग हैं। इस छोटे से प्रांत में अलग-अलग भाषा और संस्कृतियों की झलक मिलती है। उत्तर हरियाणा में देखें तो पंजाबी भाषा, पश्चिम में राजस्थानी और दक्षिण में देखें तो ब्रज भाषा और संस्कृति का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है।
जहां उत्तर हरियाणा के अंबाला, पंचकुला, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, सिरसा, फतेहाबाद में पंजाबी भांगड़ा और गिद्दा की धूम होती है, वही मध्य हरियाणा के हिसार, जींद, सोनीपत, पानीपत, रोहतक, झज्जर भिवानी में ठेठ हरियाणवी रागनियों की धाक होती है। दक्षिण हरियाणा के पलवल, फरीदाबाद, सोहना में ब्रज के मीठे और ठिठोली करते रसिया और बनचारी के विश्व प्रसिद्ध नगाड़ों की थाप सुनाई देती है तो नूंह में मेवों के सिंगलवाटी गीतों का आनंद लिया जा सकता है। राज्य सरकार ने संस्कृति के संरक्षण हेतु हरियाणा कला परिषद तथा राज्य लोक कला अकादमी की स्थापना की है। कुरुक्षेत्र, पिहोवा, सिरसा और रेवाड़ी जैसे ऐतिहासिक स्थलों को ‘धार्मिक पर्यटन सर्किट’ से जोड़कर सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा दिया गया है।
2. राजनीतिक विकास: हरियाणा की राजनीतिक यात्रा लोकतंत्र की सशक्त मिसाल है। 1966 से अब तक राज्य ने अनेक नेतृत्व परिवर्तन देखे हैं, परंतु राजनीतिक स्थिरता और सुशासन को बनाए रखा है। आज हरियाणा देश के सबसे सुशासित राज्यों में गिना जाता है।हरियाणा का केंद्र में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यहाँ के नेताओं जैसे चौधरी देवीलाल, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, मनोहर लाल खट्टर, ओमप्रकाश चौटाला आदि ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। आज भी हरियाणा से मनोहर लाल खट्टर, राव इंद्रजीत सिंह, कृष्ण पाल गुर्जर केन्द्र सरकार में मंत्री हैं। यहां की राज्य सरकार ने ई-गवर्नेंस, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन जैसे कदमों से सुशासन को नई दिशा दी है।
3. सामाजिक क्षेत्र में प्रगति: हरियाणा सामाजिक रूप से भी तेज़ी से प्रगति कर रहा है। कभी लिंगानुपात में पिछड़े इस राज्य ने उल्लेखनीय सुधार किया है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान की शुरुआत 2015 में हरियाणा से ही हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप राज्य का लिंगानुपात 2011 में 834 प्रति 1000 पुरुष से बढ़कर 2024 में लगभग 933 तक पहुंच गया है।
महिलाएँ भी अब प्रशासन, शिक्षा, सेना और खेल जैसे क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
4.शिक्षा क्षेत्र: हरियाणा ने शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य की साक्षरता दर 1966 में 35% से बढ़कर 2021 में लगभग 76.5% हो गई है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के तहत बालिकाओं की शिक्षा में बड़ा सुधार हुआ है। यहाँ IIM रोहतक, NIT कुरुक्षेत्र, LUVAS हिसार, NDRI करनाल, देश का पहला कौशल विश्वविद्यालय श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय पलवल, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार, NLU सोनीपत, केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान कार्यरत हैं। ग्रामीण शिक्षा को सशक्त बनाने हेतु स्कूल शिक्षा गुणवत्ता मिशन, हरपथ ऐप, और ई-लर्निंग पोर्टल शुरू किए गए हैं। जिससे हरियाणा अब शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में गिना जाता है। विद्यालयी शिक्षा में हरियाणा के राजकीय मॉडल संस्कृति विद्यालयों की एक पहचान बनी है। जिनमें सेक्टर 55 फरीदाबाद, कुरुक्षेत्र, रोहतक जैसे अनेकों सरकारी विद्यालयों से देश के अग्रणी शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थी प्रवेश पा रहे हैं।
5. आर्थिक विकास: हरियाणा भारत की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) 2024-25 में लगभग ₹10.5 लाख करोड़ के करीब पहुँच चुका है। प्रति व्यक्ति आय लगभग ₹3,53,182 है, जो राष्ट्रीय औसत की 176.8% है। राज्य की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि, उद्योग और सेवाओं पर आधारित है।
गुरुग्राम, फरीदाबाद, मानेसर और पानीपत जैसे शहर औद्योगिक हब बन चुके हैं। हरियाणा देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का प्रमुख केंद्र है, जहाँ मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प जैसी कंपनियाँ स्थित हैं। हरियाणा में 6 प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र हैं — गुरुग्राम-मानेसर- झज्जर, फरीदाबाद- पलवल, पानीपत, सोनीपत, हिसार और यमुनानगर।
राज्य में औद्योगिक मॉडल टाउन (IMT) योजना के तहत मानेसर, रोहतक, फरीदाबाद, बावल, कुंडली, पानीपत और सोनीपत में विशेष औद्योगिक ज़ोन विकसित किए गए हैं।
हरियाणा सरकार की HEPP (Haryana Enterprise Promotion Policy 2020) के तहत नए MSME और बड़े उद्योगों को टैक्स में छूट, भूमि आवंटन और डिजिटल अनुमति जैसी सुविधाएँ दी जा रही हैं। राज्य में लगभग 1.3 लाख लघु एवं मध्यम उद्योग इकाइयाँ कार्यरत हैं।
6. कृषि क्षेत्र में उपलब्धियाँ : हरियाणा को “भारत का अन्न भंडार” कहा जाता है। राज्य की 65% जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। हरियाणा हर साल देश के कुल गेहूँ उत्पादन का लगभग 11% और धान उत्पादन का 6% योगदान देता है।
हरियाणा हरित क्रांति का अग्रदूत रहा है। सिंचाई सुविधाओं, उच्च उत्पादकता वाले बीज, और आधुनिक तकनीक के उपयोग से यहाँ की कृषि उन्नत हुई है। माइक्रो इरिगेशन, फसल विविधीकरण योजना, और मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल जैसे कार्यक्रमों ने किसानों की आमदनी बढ़ाई है।
7. उद्योग और निवेश: हरियाणा का उद्योग क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। गुरुग्राम को “मिलेनियम सिटी” कहा जाता है और यह देश का आईटी एवं ऑटोमोबाइल केंद्र है। यहाँ 5000 से अधिक बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ कार्यरत हैं। राज्य सरकार ने हरियाणा एंटरप्राइज प्रमोशन पॉलिसी -2020 और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस पहल के तहत निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है। इसके परिणामस्वरूप 2024 तक राज्य में ₹3.2 लाख करोड़ से अधिक का निवेश हुआ है।
8. खेलकूद में उपलब्धियाँ: हरियाणा को “भारत की खेल नर्सरी” कहा जाता है। 2024 पेरिस ओलंपिक में भारत को मिले कुल पदकों में से एक-तिहाई से अधिक खिलाड़ी हरियाणा से थे।
नीरज चोपड़ा (भाला फेंक), बजरंग पुनिया (कुश्ती), साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, और रानी रामपाल जैसी खिलाड़ियों ने हरियाणा का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया है। राज्य सरकार खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि, सरकारी नौकरियाँ और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल अकादमियाँ उपलब्ध करवा रही है।
9. अवसंरचना और शहरी विकास: हरियाणा में सड़क, बिजली, और जल आपूर्ति के क्षेत्र में बड़ा सुधार हुआ है। राज्य की 99% ग्रामीण आबादी बिजली और सड़क से जुड़ चुकी है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से सटे जिलों जैसे गुरुग्राम, सोनीपत, फरीदाबाद, पलवल, रेवाडी, झज्जर में विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित हुआ है।
राज्य में फरीदाबाद, पलवल, गुरुग्राम, बहादुरगढ तक मेट्रो रेल विस्तार, कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे, और दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसी परियोजनाएँ हरियाणा को देश की आर्थिक धुरी बना रही हैं।
10. पर्यावरण और ऊर्जा : हरियाणा ने सौर ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण में भी कदम बढ़ाए हैं। राज्य का लक्ष्य 2030 तक कुल बिजली उत्पादन का 20% नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करना है। हरियाणा सोलर पॉलिसी 2021 के तहत अब तक 1200 मेगावाट से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है। साथ ही, वन क्षेत्र में भी लगातार वृद्धि हो रही है — जो अब राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 7.5% है।
निष्कर्ष रूप में हम कह सकते हैं कि हरियाणा ने पिछले 59 वर्षों में अपने परिश्रम, अनुशासन और दूरदर्शिता से उल्लेखनीय प्रगति की है। यह राज्य आज कृषि, उद्योग, शिक्षा, खेल, और शासन—सभी क्षेत्रों में देश का नेतृत्व कर रहा है।
हरियाणा सरकार ने सभी 22 जिलों में स्वदेशी मेले लगाने की पहल की है। जिसके माध्यम से हरियाणा के नवोदित उद्यमियों को बहुत बढ़त मिलेगी और हरियाणा में आने वाले समय में नवाचार और स्टार्टअप्स की बाढ़ देखने को मिल सकती है।
