इंडस्ट्री में एफएआर में असमानता पर पीसीसीआई चेयरमैन अरुण ग्रोवर ने एमडी को लिखा पत्र
सभी औद्योगिक प्लाटों पर एक समान दर लागू करने की मांग उठाई
पंचकूला। पंचकूला चेंबर्स आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज (पीसीसीआई) के चेयरमैन अरुण ग्रोवर ने औद्योगिक प्लाटों पर लागू एफएआर (फ्लोर एरिया रेशो) नीति में कथित असमानता को लेकर हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं संरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। इस संबंध में पीसीसीआई की ओर से एचएसआईआईडीसी के प्रबंध निदेशक डा. आदित्य दहिया को पत्र भेजकर नीति की समीक्षा कर सभी औद्योगिक प्लाटों पर एक समान दर लागू करने की मांग उठाई गई है।
पत्र में बताया गया है कि औद्योगिक प्लॉटों पर एफएआर नीति लागू करते समय अलग-अलग परिस्थितियों में तीन अलग-अलग दरें वसूली जा रही हैं, जो औद्योगिक इकाइयों के साथ असमानता पैदा कर रही हैं। पीसीसीआई के अनुसार 30 जून 2016 से पहले आवंटित प्लॉटों पर एक दर, 1 जुलाई 2016 के बाद आवंटित प्लॉटों पर दूसरी दर तथा एचयूडीए से एचएसआईआईडीसी को ट्रांसफर हुए प्लॉटों पर तीसरी अलग दर लागू की जा रही है।
अरुण ग्रोवर ने कहा कि एक जैसे औद्योगिक प्लॉटों पर अलग-अलग दरें लागू होना न केवल अनुचित है बल्कि इससे उद्यमियों के बीच असमानता पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से औद्योगिक क्षेत्र में भ्रम की स्थिति बन रही है, निवेश और विस्तार की योजनाओं को झटका लग रहा है तथा अनावश्यक विवाद और प्रतिनिधित्व बढ़ रहे हैं।
पीसीसीआई ने यह भी उल्लेख किया है कि औद्योगिक विकास प्राधिकरणों का उद्देश्य उद्योगों को बढ़ावा देना, कारोबार को आसान बनाना और विकासोन्मुख माहौल तैयार करना होता है। लेकिन मौजूदा व्यवस्था उद्योगों को प्रोत्साहित करने के बजाय उन्हें हतोत्साहित कर रही है।
पत्र में यह भी बताया गया है कि पीसीसीआई पहले भी 14 नवंबर 2025 और 12 फरवरी 2026 को इस विषय पर पत्र लिख चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। संगठन ने कर्नाटक और पंजाब जैसे राज्यों की नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि वहां समान मामलों में एक समान और पारदर्शी नीति अपनाई गई है।
पीसीसीआई के चेयरमैन अरुण ग्रोवर ने एचएसआईआईडीसी से मांग की है कि इस मामले की प्राथमिकता के आधार पर जांच की जाए, एफएआर दरों में मौजूद असमानता खत्म की जाए और सभी औद्योगिक प्लॉटों के लिए एक समान व तार्किक दर संरचना लागू की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से उद्योग जगत का विश्वास मजबूत होगा और हरियाणा को एक प्रगतिशील औद्योगिक राज्य के रूप में और मजबूती मिलेगी। पीसीसीआई ने उम्मीद जताई है कि सरकार और एचएसआईआईडीसी इस मुद्दे पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर औद्योगिक क्षेत्र को बड़ी राहत देंगे।
