‘रानी की छतरी’ और ‘शाही तालाब’ को मिला नया जीवन, राजमार्ग से किया कनेक्ट

फरीदाबाद। करोड़ों रुपये की लागत से संवारी गई रानी की छतरी और शाही तालाब को देखने के लिए अब लोग सीधे आ-जा सकेंगे। प्रशासन ने छतरी परिसर में बने हुए अवैध निर्माणों को तोड़ दिया है। राजमार्ग से जो भी व्यक्ति निकलेगा उसे अब यह ऐतिहासिक स्थल दूर से ही दिखाई देंगे। अब तक यह अवैध निर्माणों से घिरे हुए थे। गौरतलब है कि बल्लभगढ़ के राजा अनिरुद्ध सिंह की रानी ने राजमार्ग के पास अपनी पति की स्मृति में 1818 में छतरी बनवाई थी। यहां पर एक शाही तालाब है। इस तालाब में रानी स्नान करके अपनी पति की स्मृति में छतरी की छत पर हवन-यज्ञ करती थी। अभी भी यहां पर यज्ञशाला है। बल्लभगढ़ के अंतिम राजा नाहर सिंह 1858 की क्रांति में अंग्रेजों से लड़े थे। उन्हें अंग्रेजों ने संधि करने के बहाने धोखे से गिरफ्तार कर लिया।

राजा नाहर सिंह और उनके साथियों को नौ जनवरी-1859 को चांदनी चौक के लालकुआं पर सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया। इसके बाद इन ऐतिहासिक स्थलों की कोई देख-रेख नहीं की गई। यह स्थल पूरी तरह से जर्जर हो गए। पूर्व मंत्री एवं विधायक मूलचंद शर्मा ने 2019 में छतरी का सवा करोड़ रुपये सरकार से मंजूर कराकर जीर्णोद्धार काम शुरू करा दिया। इसका दो फरवरी-2023 के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उद्घाटन भी कर दिया। तब जीर्णोद्धार से छतरी की छत और नीचे का फर्श रह गया था। पूर्व मंत्री एवं विधायक मूलचंद शर्मा ने छतरी की छत और फर्श के जीर्णोद्धार के लिए सरकार से 1.33 करोड़ रुपये मंजूर करा दिए और 29 सितंबर को इस का शुभारंभ पुरातत्व विभाग के मंत्री डा. अरविंद शर्मा ने करा दिया।

अभी जीर्णोद्धार का काम जोरों से चल रहा है। छतरी जब तक आम लोगों के देखने के लिए तैयार होगी, तब तक पूर्व मंत्री विधायक मूलचंद शर्मा आसपास के पूरे परिसर को विकसित और सुंदर बनाने की योजना तैयार करवा रहे हैं। एसडीएम मयंक भारद्वाज का कहना है कि छतरी का जीर्णोद्धार का काम जोरों से चल रहा है। हम इसका निरीक्षण करते रहते हैं। यहां पर इतिहास में जो छात्र अनुसंधान का काम कर रहे हैं, वह भी समय-समय पर आते रहते हैं। ऐतिहासिक धरोहर को संवारा जा रहा है। पूर्वमंत्री एवं विधायक मूलचंद शर्मा ने कहा कि रानी की छतरी और तालाब को राजमार्ग से जोडऩे में कुछ अवैध निर्माण बाधक बने हुए थे। उन्हें हटा दिया गया है। अब दोनों ऐतिहासिक स्थलों को राजमार्ग से सीधा जोड़ दिया जाएगा। ताकि दूर-दराज से आने वाले सीधे परिसर में प्रवेश कर सकें।

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