संसद भवन में डॉ. रमेश कुमार योगाचार्य ने कराया योगाभ्यास

संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पूर्व भव्य योग कार्यशाला का आयोजन किया ।

नई दिल्ली : “21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026” के उपलक्ष्य में संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा संसद भवन एनेक्सी, नई दिल्ली के मुख्य समिति कक्ष में एक विशेष योग कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य मंत्रालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को योग के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक लाभों से अवगत कराना तथा उन्हें नियमित योगाभ्यास के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम में श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के योग विज्ञान विभाग के प्रख्यात योग विशेषज्ञ प्रो. रमेश कुमार योगाचार्य के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यशाला का शुभारम्भ संसदीय कार्य मंत्रालय के अपर सचिव डॉ. सत्य प्रकाश द्वारा किया गया। उन्होंने डॉ. रमेश कुमार एवं उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का स्वागत करते हुए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर भारत सरकार द्वारा आयोजित किए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर है, जो आज सम्पूर्ण विश्व को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का मार्ग प्रसस्त कर रही है।

अपने व्याख्यान एवं प्रशिक्षण सत्र में प्रो. (डॉ.) रमेश कुमार ने योग के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्तमान समय में कार्यालयीन कार्यों के बढ़ते दबाव, मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या तथा शारीरिक निष्क्रियता के कारण अनेक स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। ऐसी परिस्थितियों में योग, प्राणायाम और ध्यान व्यक्ति को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति एवं कार्यक्षमता प्रदान करने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने विशेष रूप से प्राणायाम और ध्यान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नियमित प्राणायाम से श्वसन तंत्र सुदृढ़ होता है, मानसिक एकाग्रता बढ़ती है तथा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। वहीं ध्यान व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मकता और आत्मिक संतुलन प्रदान करता है।

डॉ. रमेश कुमार ने विशेष रूप से बताया कि यदि कार्यदिवसों के दौरान प्रतिदिन कुछ समय योग एवं प्राणायाम के लिए निकाला जाए तो कर्मचारियों में तनाव, थकान एवं मानसिक दबाव में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, सकारात्मक चिंतन, आत्मानुशासन तथा कार्यकुशलता को बढ़ाने का एक समग्र साधन है।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को आयुष मंत्रालय द्वारा निर्धारित कॉमन योग प्रोटोकॉल के अनुरूप विभिन्न योगासनों, प्राणायाम एवं ध्यान अभ्यासों का प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने गहरी श्वास-प्रश्वास जैसी प्राणायाम विधियों का अभ्यास कराया। साथ ही ध्यान के माध्यम से मन को एकाग्र एवं तनावमुक्त बनाने की सरल तकनीकों से भी अभ्यास कराया।

डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि स्वामी रामदेव एवं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग आज वैश्विक जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर चुका है। विश्व के अनेक देशों में योग के प्रति बढ़ती रुचि भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है। उन्होंने सभी नागरिकों से प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट योग एवं ध्यान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का अनुराध किया।

कार्यक्रम में संसदीय कार्य मंत्रालय के अपर सचिव डॉ. सत्य प्रकाश, उप सचिव श्री मुकेश कुमार, उप सचिव श्री एस. एस. पात्रा, मण्डल बाल कल्याण अधिकारी श्री कमलेश शास्त्री, आई आई एम बोध गया की योग शिक्षिका सुश्री विनीत यादव सहित मंत्रालय के अनेक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों ने योगाभ्यास के दौरान गहरी रुचि दिखाई तथा योग को नियमित रूप से अपनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के अंत में मंत्रालय के उप सचिव श्री एस. एस. पात्रा ने प्रो. (डॉ.) रमेश कुमार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्यशाला न केवल स्वास्थ्य जागरूकता का माध्यम बनी, बल्कि कर्मचारियों के बीच सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास एवं स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई। यह योग कार्यशाला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के व्यापक जन-जागरूकता अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही, जिसने यह संदेश दिया कि योग स्वस्थ, संतुलित एवं तनावमुक्त जीवन की आधारशिला है तथा इसे जीवन का अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिए।

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