फरीदाबाद। स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज , के. आर. मंगलम विश्वविद्यालय में 20 मई 2026 को प्रो0 जे0 एस 0 यादव की अगुवाई में विश्व मधुमक्खी दिवस बड़े उत्साह एवं जागरूकता कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि एवं खाद्य सुरक्षा में मधुमक्खियों की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करना तथा विद्यार्थियों एवं किसानों के बीच मधुमक्खियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना था। कार्यक्रम में सतत कृषि उत्पादन एवं पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए मधुमक्खियों की संख्या सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. राबिया बसरी, सहायक प्राध्यापक, कीट विज्ञान ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा बनाए रखने में मधुमक्खियों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मधुमक्खियां केवल शहद ही नहीं बल्कि मधुमोम (बीज़वैक्स), प्रोपोलिस, परागकण (पोलन), रॉयल जेली एवं बी वेनम जैसे बहुमूल्य उत्पाद भी प्रदान करती हैं, जिनका पोषण, औषधीय एवं व्यावसायिक महत्व है।
जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को लौंग मिश्रित इन्फ्यूज्ड शहद का स्वाद चखाया गया तथा उसके स्वास्थ्य लाभ एवं औषधीय गुणों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही मधुमोम से बनी मोमबत्तियों एवं प्रोपोलिस टिंचर का प्रदर्शन भी किया गया, जिससे विद्यार्थियों को मधुमक्खी आधारित उत्पादों एवं उनके उपयोगों की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई। इस अवसर पर कृषि विज्ञान संकाय के डीन प्रो. (डॉ.) जे. एस. यादव ने किसानों से अपील भी की, कि वे फसलों के खेतों में मधुमक्खी पालकों को पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराएं, जिससे मधुमक्खियों की गतिविधियों को बढ़ावा मिले तथा परागण क्षमता में वृद्धि हो सके। किसान कीटनाशकों का उपयोग कम व सावधानी से करें ताकि मधुमक्खी को नुक़सान ना हो। उन्होंने बताया कि मधुमक्खियां फल, सब्जियों एवं विभिन्न फसलों के परागण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे कृषि उत्पादकता एवं जैव विविधता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। कार्यक्रम के समापन पर पर्यावरण संरक्षण एवं कृषि समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए मधुमक्खियों के संरक्षण तथा मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।
