प्रो. विधु रावल
वैश्विक संकटों के दौर में जब विश्व अस्थिरता की चपेट में है, भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दृढ़ता से राष्ट्र का नेतृत्व कर रहे हैं। लेकिन असफलता और वंशवादी अहंकार से ग्रस्त कांग्रेस के शहजादे राहुल गांधी, भारत के प्रधानमंत्री को गद्दार कहने की हद तक गिर गए हैं। यह न केवल राजनीतिक अशिष्टता है, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र का घोर अपमान है। एक ऐसे नेता पर, जिन्होंने अपना पूरा जीवन भारत माता की सेवा में समर्पित कर दिया है, संविधान खत्म करने का मूर्खतापूर्ण आरोप लगाना, राहुल गांधी के मानसिक दिवालियेपन को उजागर करता है।
नरेंद्र मोदी का नेतृत्व इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा। अत्यंत गरीबी में पैदा होकर, चाय बेचने वाले एक साधारण कार्यकर्ता से देश के प्रधानमंत्री बनने की उनकी यात्रा, लोकतंत्र की सबसे बड़ी मिसाल है। मोदी सरकार ने भारत को विश्व की महान अर्थव्यवस्था बनाया है। जीएसटी, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, आत्मनिर्भर भारत, चंद्रयान-3 की सफलता, जी20 की मेजबानी – ये उपलब्धियां किसी एक व्यक्ति के नहीं, बल्कि एक राष्ट्रभक्त के दूरदर्शी विजन की हैं। कोरोना महामारी जैसे वैश्विक संकट में मोदी ने न केवल वैक्सीन टीकाकरण का विश्व रिकॉर्ड बनाया, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को भी शानदार तरीके से संभाला। उस दौर में भी राहुल गांधी और पूरा विपक्ष केवल वॉक्सीन की आलोचना में ही लीन रहा, जबकि मोदी ने वसुधैव कुटुंबकम का सिद्धांत अपनाते हुए विश्व भर के 100 से अधिक देशों को वॉक्सीन उपलब्ध कराई।
राहुल गांधी का आरोप कि मोदी संविधान खत्म करना चाहते हैं, हास्यास्पद और झूठा है। वास्तव में, राहुल के मूर्खतापूर्ण आरोपों के विपरीत मोदी सरकार ने संवैधानिक संस्थाओं को मजबूत किया है। अनुच्छेद 370 का निरसन करके जम्मू-कश्मीर को मुख्यधारा में लाया, राम मंदिर का निर्माण न्याय की जीत है, समान नागरिक संहिता की दिशा में कदम उठाए गए हैं। ये कदम भारत को एक सूत्र में बांधने वाले हैं, न कि तोड़ने वाले। राहुल गांधी, जो विदेश में जाकर भारत की छवि खराब करते हैं, भारत जोड़ो यात्रा का नाटक करके ख़ुद को सत्तासीन करने के स्वप्न देखते हैं, लेकिन वास्तव में सत्ता में वापसी का असफल अभियान चलाते हैं।
राहुल गांधी के खानदान की भारत से गद्दारी की परंपरा पुरानी है। इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाकर लोकतंत्र की हत्या की, प्रेस की स्वतंत्रता कुचली, विपक्षी नेताओं को जेल भेजा। राजीव गांधी के समय भोपाल गैस त्रासदी में न्याय नहीं मिला, 1984 के सिख विरोधी दंगों में हजारों निर्दोष मारे गए। सोनिया गांधी के शासनकाल में 2G घोटाला, कोयला घोटाला, CWG घोटाला जैसे असंख्य घोटालों द्वारा लाखों करोड़ का भ्रष्टाचार हुआ। राहुल गांधी स्वयं नेशनल हेराल्ड मामले में आरोपी हैं। यह वंश परंपरा है – सत्ता हथियाना, राष्ट्र को लूटना और फिर राष्ट्रभक्ति का ढोंग रचना।
राहुल गांधी का राजनीतिक करियर असफलताओं की श्रृंखला है। अमेठी से हार, वायनाड पर निर्भरता, कांग्रेस पार्टी को लगातार चुनावी हार। भारत की रक्षा ज़रूरतों को पूरी करने वाली राफ़ेल फाइटरजेट खरीद पर चौकीदार चोर है कहकर राहुल गांधी ने न सिर्फ़ खुद को शर्मिंदा किया, बल्कि सुप्रीम कोर्ट से फटकार खाकर लिखित माफ़ी भी माँगी। इसी प्रकार महान स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर का अपमान करने पर भी न्यायालय ने राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया तथा चीनी सेना द्वारा भारत के सैनिकों को पीटे जाने की झूठी खबर फैलाने पर राहुल गांधी की देशभक्ति पर गंभीर सवाल खड़े किए।
लगातार मिल रही चुनावी असफलता, राजनीतिक हताशा और वंशवादी अहंकार से ग्रस्त होकर राहुल गांधी द्वारा स्वाभिमानी देश भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री को गद्दार कहना पूर्ण रूप से अस्वीकारीय है जिसकी मुक्त कंठ से निंदा की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी पर व्यक्तिगत आक्रमण करना, उनकी मां, परिवार या ग़रीबी की पृष्ठभूमि को घसीटना, राहुल के राजनीतिक दिवालियापन दर्शाता है। मोदी जी का जीवन पारदर्शी है जिसमें न कोई स्विस बैंक अकाउंट, न कोई पनामा पेपर और न ही कोई घोटाला शामिल है।
प्रधानमंत्री मोदी का शानदार नेतृत्व भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में अग्रसर है। वोकल फॉर लोकल, मेक इन इंडिया से निर्यात बढ़ा है। डिफेंस में आत्मनिर्भरता बढ़ी, पारदर्शी ढंग से हुआ राफेल सौदा भारत की वायु सुरक्षा का अभिन्न अंग बन चुका है। पड़ोसी देशों की घुसपैठ और आतंकवाद पर सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक तथा ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को सबक सिखाया है। लद्दाख और डोकलाम में चीन का सामना करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सेना को पूरा समर्थन दिया। अर्थव्यवस्था में सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति, हाईवे, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, स्मार्ट सिटी में भारत बदला हुआ दिखता है।
दूसरी तरफ़ राहुल गांधी का खानदान ब्रिटिश काल से लेकर आज तक सत्ता की ओह में रहा है। जवाहरलाल नेहरू की नीतियों ने भारत को समाजवादी जाल में फंसाया, जिससे गरीबी बढ़ी। इंदिरा-राजीव काल भ्रष्टाचार और तानाशाही का चरम था। सोनिया-राहुल काल में भारत घोटाले, आतंकवाद, अव्यवस्था और महंगाई का गुलाम बना रहा। जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने सिस्टम को पूरी तरह बदल दिया है। जनधन अकाउंट से गरीबों को बैंकिंग, उज्ज्वला से महिलाओं को सम्मान, स्टैंडअप इंडिया से युवाओं को अवसर प्रदान किए हैं।
भारत की जनता खूब अच्छे से जानती है कि कौन सच्चा राष्ट्रभक्त है और कौन ख़ानदानी गद्दार। नरेंद्र मोदी और भाजपा की एक के बाद एक अप्रत्याशित चुनावी विजय, जनता का विश्वास प्रदर्शित करती है। राहुल गांधी जैसे वंशवादी नेता, जो विदेशी शक्तियों से प्रेरणा लेते प्रतीत होते हैं, भारत की एकता को तोड़ने में लगे हैं। मोदी हटाओ का नारा अब पुराना हो चुका है।
राहुल गांधी को याद रखना चाहिए कि भारत अब 1970 या 2004 का भारत नहीं है। यह नया भारत है- आत्मनिर्भर, गौरवशाली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके वास्तुकार हैं। उनके नेतृत्व में भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। जबकि गद्दारी का आरोप लगाने वाले राहुल गांधी खुद गद्दारी की परंपरा के वारिस हैं। जनता इनके चेहरे पर आईने की तरह सच दिखा चुकी है, लेकिन बार-बार मिली करारी चुनावी हार भी उनकी अक्ल ठिकाने नहीं लगा पा रही। [लेखक भाजपा प्रवक्ता हैं]
