डिलीवरी मामले में ग्रुप डी कर्मचारी की बर्खास्तगी बड़े अधिकारियों के बचाने का प्रयास : सुभाष लांबा

बर्खास्तगी के खिलाफ कर्मचारियों ने लामबंद हो कर किया धरना-प्रदर्शन

फरीदाबाद। पिछले शुक्रवार रात को सेक्टर तीन स्थित प्रजनन एवं स्वास्थ्य शिशु केन्द्र (एफआरयू 2 ) में एक महिला की पार्किंग के अंधेर में हुई डिलिवरी होने की शर्मनाक घटना घटित हुई। जिसके लिए विभाग ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को जिम्मेदार ठहराते हुए बर्खास्त कर दिया। इसके खिलाफ डाक्टरों सहित सभी श्रेणियों के कर्मचारियों ने लामबंद हो धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। शुक्रवार को दूसरे दिन भी धरना प्रदर्शन जारी रहा और स्वास्थ्य सेवाएं ठप्प रही। मेल्टीपर्पज हैल्थ वर्कर्स एंड सुपरवाइजर एसोसिएशन हरियाणा की तालमेल कमेटी की नेता आशा शर्मा, जिला चेयरमैन जितेन्द्र मोर, प्रधान सबिता,एमपीएचई के प्रधान श्यामबीर सिंह, सचिव अजय प्रजापति और आशा वर्कर यूनियन की राज्य प्रधान सुधा व जिला प्रधान हेमलता ने चेतावनी दी कि बर्खास्तगी व ट्रांसफर आदेश वापस लेने की मांग को लेकर सोमवार से पूरे जिले के कर्मचारी आंदोलन पर चले जाएंगे। जिसकी जिम्मेदारी सरकार व विभाग की होगी।

धरने प्रदर्शन को उस समय बल मिला जब सेक्टर तीन रेजिडेंट वेलफेयर फेडरेशन के प्रधान सुभाष लांबा और महासचिव रतनलाल राणा अपने दर्जनों पदाधिकारियों के साथ धरना प्रदर्शन में पहुंच गए और ग्रुप डी कर्मचारी सुखबीर सिंह को बर्खास्त करने के खिलाफ चल रहे आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि डिलिवरी मामले में विभाग चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की बर्खास्त करके जिम्मेदार बड़े अधिकारियों के बचाने का प्रयास कर रहा है। जिसको सहन नहीं किया जा सकता है। फेडरेशन के प्रधान सुभाष लांबा ने कहा कि पार्किंग के अंधेर में किसी महिला की डिलीवरी होना काफी शर्मनाक घटना है। जिससे हम सब स्तब्ध है।  उन्होंने कहा कि मेन गेट किस अधिकारी ने बंद कराया था, पार्किंग में अंधेरा क्यों है, डिलीवरी वाले तल पर पीने का पानी और वाशरूम में हाथ साफ करने का पानी क्यों नहीं है, डिलीवरी में सबसे आवश्यक अल्ट्रासाउंड मशीन क्यों नहीं है और अस्पताल में रात को सिजेरियन डिलीवरी आपरेशन क्यों नहीं हो रहें हैं,इसकी जांच क्यों नहीं की गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या इन सबके लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और स्टाफ नर्स जिम्मेदार है।

उन्होंने कहा कि स्टाफ के बार बार कहने के बावजूद बीके अस्पताल की तरह गेट पर चौकीदार या सुरक्षा गार्ड क्यों नहीं है। अगर ऐसा होता तो यह शर्मनाक घटना घटित ही नहीं होती। इसके लिए जिम्मेदार कौन है? उन्होंने कहा कि सुखबीर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का पद धोबी है। इसके बावजूद वह मल्टी टास्क स्टाफ की तरह काम करता है और डिलीवरी के समय वह मौके पर मौजूद था और उसने व स्टाफ नर्स ने ही जच्चा-बच्चा को वार्ड में शिफ्ट किया। सुखबीर सिंह ने जच्चा-बच्चा (दोनों) का पूरा ख्याल भी रखा। जिसके कारण महिला और उनके परिजन संतुष्ट हैं और उन्होंने सीएमओ को यह लिखकर भी दिया है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था की विफलता है, इसके लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके लिए यहां के अधिकारी, सीएमओ,डीजी और एचएम सहित सभी अन्य उच्च अधिकारी जिम्मेदार है। जिन्होंने समय रहते व्यवस्था ठीक क्यों नहीं की।धरना प्रदर्शन को अन्य के अलावा सीटू के जिला प्रधान निरंतर पाराशर व सचिव वीरेंद्र डंगवाल,एमपीएचई के प्रधान श्यामबीर सिंह, सचिव अजय प्रजापति,कोषाध्यक्ष कपिल शर्मा,प्रेस सचिव शशि, ज्वाइंट कन्वीनर आशा आदि ने संबोधित किया।

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