स्वतंत्रता की विरासत से सत्ता के विलास का भ्रष्टाचार: प्रो. विधु रावल

नेशनल हेराल्ड घोटाला महज एक आर्थिक अपराध नहीं, यह स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों और लोकतंत्र की आत्मा केसाथ किया गया एक अमानवीय विश्वासघात है। इस घोटाले के केंद्र में गांधी खानदान के उत्तराधिकारी सोनिया गांधी और राहुल गांधी खड़े हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को अपने खानदानी व्यापार में तब्दील कर दिया। दुर्भाग्य का विषय है कि जिस नेशनल हेराल्ड अखबार को 1938 में स्वतंत्रता आंदोलन की बुलंद आवाज़ बनाने के लिए स्थापित किया गया था, उसे सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने 2010 में अपने भ्रष्टाचार और निजी लालच का ज़रिया बना लिया।

सिर्फ़ 50 लाख रुपये देकर, इन दोनों ने कांग्रेस पार्टी का 90.21 करोड़ का कथित कर्ज यंग इंडियन नामक एक निजी कंपनी को ट्रांसफर कराया, जिसकी 76% हिस्सेदारी खुद सोनिया और राहुल के पास थी। नतीजा यह हुआ कि नेशनल हेराल्ड की 2000 करोड़ से अधिक मूल्य की संपत्ति सीधे इनकी जेब में पहुँच गई। यह धन सृजन नहीं, बल्कि देश की जनता की आँखों में धूल झोंककर की गई एक डकैती थी, जिसे एनफोर्समेंट डायरेक्ट्रेट ने अपनी चार्जशीट में आपराधिक साजिश और पब्लिक मनी की निजी लूट करार दिया है।

इससे भी अधिक शर्मनाक और नैतिक पतन का उदाहरण तब देखने को मिला जब राहुल गांधी ने 2022 में, इस घोटाले की जवाबदेही से बचने के लिए, अपने दिवंगत सहयोगी मोतीलाल वोहरा पर दोष मढ़ दिया। वो मोतीलाल वोहरा, जिन्होंने पचास साल तक गांधी परिवार की सेवा की, उनकी मौत के सिर्फ़ दो साल बाद उन्हें इस साजिश का मुख्य गुनहगार बताने की कायर और कुत्सित कोशिश की गई। यह न केवल बेशर्मी की पराकाष्ठा है, बल्कि यह गांधी खानदान की सामंतवादी मानसिकता को भी उजागर करता है, जिसमें वफादारी को एक बार इस्तेमाल करने के बाद कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है।

राहुल गांधी हर मंच से देश के अडानी, अंबानी आदि उद्योगपतियों पर भ्रष्टाचार के झूठे और मनघड़ंत आरोप लगाते फिरते हैं। लेकिन लाखों लोगों को रोजगार देने वाले उद्योगपति, देश के इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और तकनीक क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं, और सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करते हुए पारदर्शिता के साथ अपने व्यवसाय का विस्तार कर रहे हैं। जिनकी संपत्ति का स्रोत खुले शेयर बाज़ार, सरकारी नीतियाँ और निवेशक विश्वास है जबकि राहुल गांधी और उनकी माँ पर काग़ज़ी कंपनियाँ बना कर अरबों की जमीन हथियाने की चार्जशीट ईडी ने कोर्ट में दिए हैं।

गांधी परिवार की संपत्ति और सत्ता की भूख उनके द्वारा किए गए घोटालों की लंबी श्रृंखला से प्रमाणित है। 2G स्पेक्ट्रम घोटाला, कोयला आवंटन घोटाला, राष्ट्रमंडल खेल घोटाला, अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदा आदि घोटालों के ज़रिए कांग्रेस ने भ्रष्टाचार को ही अपनी पहचान बना लिया था। इन सभी घोटालों में नियमों की धज्जियाँ उड़ाना, स्वतंत्रता की विरासत से सत्ता के विलास का भ्रष्टाचार: प्रो. विधु रावल

नेशनल हेराल्ड घोटाला महज एक आर्थिक अपराध नहीं, यह स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों और लोकतंत्र की आत्मा के साथ किया गया एक अमानवीय विश्वासघात है। इस घोटाले के केंद्र में गांधी खानदान के उत्तराधिकारी सोनिया गांधी और राहुल गांधी खड़े हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को अपने खानदानी व्यापार में तब्दील कर दिया। दुर्भाग्य का विषय है कि जिस नेशनल हेराल्ड अखबार को 1938 में स्वतंत्रता आंदोलन की बुलंद आवाज़ बनाने के लिए स्थापित किया गया था, उसे सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने 2010 में अपने भ्रष्टाचार और निजी लालच का ज़रिया बना लिया।

सिर्फ़ 50 लाख रुपये देकर, इन दोनों ने कांग्रेस पार्टी का 90.21 करोड़ का कथित कर्ज यंग इंडियन नामक एक निजी कंपनी को ट्रांसफर कराया, जिसकी 76% हिस्सेदारी खुद सोनिया और राहुल के पास थी। नतीजा यह हुआ कि नेशनल हेराल्ड की 2000 करोड़ से अधिक मूल्य की संपत्ति सीधे इनकी जेब में पहुँच गई। यह धन सृजन नहीं, बल्कि देश की जनता की आँखों में धूल झोंककर की गई एक डकैती थी, जिसे एनफोर्समेंट डायरेक्ट्रेट ने अपनी चार्जशीट में आपराधिक साजिश और पब्लिक मनी की निजी लूट करार दिया है।

इससे भी अधिक शर्मनाक और नैतिक पतन का उदाहरण तब देखने को मिला जब राहुल गांधी ने 2022 में, इस घोटाले की जवाबदेही से बचने के लिए, अपने दिवंगत सहयोगी मोतीलाल वोहरा पर दोष मढ़ दिया। वो मोतीलाल वोहरा, जिन्होंने पचास साल तक गांधी परिवार की सेवा की, उनकी मौत के सिर्फ़ दो साल बाद उन्हें इस साजिश का मुख्य गुनहगार बताने की कायर और कुत्सित कोशिश की गई। यह न केवल बेशर्मी की पराकाष्ठा है, बल्कि यह गांधी खानदान की सामंतवादी मानसिकता को भी उजागर करता है, जिसमें वफादारी को एक बार इस्तेमाल करने के बाद कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है।

राहुल गांधी हर मंच से देश के अडानी, अंबानी आदि उद्योगपतियों पर भ्रष्टाचार के झूठे और मनघड़ंत आरोप लगाते फिरते हैं। लेकिन लाखों लोगों को रोजगार देने वाले उद्योगपति, देश के इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और तकनीक क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं, और सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करते हुए पारदर्शिता के साथ अपने व्यवसाय का विस्तार कर रहे हैं। जिनकी संपत्ति का स्रोत खुले शेयर बाज़ार, सरकारी नीतियाँ और निवेशक विश्वास है जबकि राहुल गांधी और उनकी माँ पर काग़ज़ी कंपनियाँ बना कर अरबों की जमीन हथियाने की चार्जशीट ईडी ने कोर्ट में दिए हैं।

गांधी परिवार की संपत्ति और सत्ता की भूख उनके द्वारा किए गए घोटालों की लंबी श्रृंखला से प्रमाणित है। 2G स्पेक्ट्रम घोटाला, कोयला आवंटन घोटाला, राष्ट्रमंडल खेल घोटाला, अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदा आदि घोटालों के ज़रिए कांग्रेस ने भ्रष्टाचार को ही अपनी पहचान बना लिया था। इन सभी घोटालों में नियमों की धज्जियाँ उड़ाना, सरकारी संपत्तियों को निजी खजाने में बदल देना, और जब पकड़े जाएँ, तो या तो झूठ बोलना या वफादारों को बलि का बकरा बनाना एक ही तरह का पैट्रेन है।

प्रवर्तन निदेशालय द्वारा ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ की चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद गांधी परिवार अब कानून की जद में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वाक्य-“जिन्होंने देश लूटा है, उन्हें लौटाना होगा”, अब हकीकत बन रहा है। यह केवल सोनिया और राहुल के पतन की कहानी नहीं है, यह उस मानसिकता का पतन है जो सत्ता को जन्मसिद्ध अधिकार समझती है, और लोकतंत्र को सिर्फ़ एक मुखौटा।

देश को आगे ले जाने वाला वह है जो कानून का पालन करता है, रोजगार देता है, निर्माण करता है ना कि वह जो सिर्फ़ अपने खानदान के विलास और सत्ता की भूख के लिए देश के संस्थानों, स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत और जनता की मेहनत की कमाई को लूटता है। सोनिया और राहुल गांधी को अब न सिर्फ़ कानूनी, बल्कि नैतिक और ऐतिहासिक जिम्मेदारी से भी जवाबदेह ठहराना होगा।
लेखक भाजपा प्रवक्ता हैंसरकारी संपत्तियों को निजी खजाने में बदल देना, और जब पकड़े जाएँ, तो या तो झूठ बोलना या वफादारों को बलि का बकरा बनाना एक ही तरह का पैट्रेन है।

प्रवर्तन निदेशालय द्वारा ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ की चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद गांधी परिवार अब कानून की जद में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वाक्य-“जिन्होंने देश लूटा है, उन्हें लौटाना होगा”, अब हकीकत बन रहा है। यह केवल सोनिया और राहुल के पतन की कहानी नहीं है, यह उस मानसिकता का पतन है जो सत्ता को जन्मसिद्ध अधिकार समझती है, और लोकतंत्र को सिर्फ़ एक मुखौटा।

देश को आगे ले जाने वाला वह है जो कानून का पालन करता है, रोजगार देता है, निर्माण करता है ना कि वह जो सिर्फ़ अपने खानदान के विलास और सत्ता की भूख के लिए देश के संस्थानों, स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत और जनता की मेहनत की कमाई को लूटता है। सोनिया और राहुल गांधी को अब न सिर्फ़ कानूनी, बल्कि नैतिक और ऐतिहासिक जिम्मेदारी से भी जवाबदेह ठहराना होगा।
लेखक भाजपा प्रवक्ता हैं

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