तुष्टिकरण पर लोकतंत्र की निर्णायक विजय: प्रो. विधु रावल
4 अप्रैल, 2025 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया, जब वक्फ संशोधन विधेयक-2025 देश की संसद के दोनों सदनों में भारी बहुमत से पारित हुआ। यह विधेयक केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक चेतना, सामाजिक समरसता और पारदर्शिता की ओर बढ़ते कदम का प्रतीक बन गया है। यह उस संघर्ष की परिणति है, जिसमें जनता ने तुष्टिकरण की राजनीति, विपक्षी दलों के अराजक मंसूबों और वर्षों से चले आ रहे एकपक्षीय सत्ता संरचना को निर्णायक रूप से नकार दिया।
विधेयक के पारित होने से पूर्व विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस और उससे जुड़ा इकोसिस्टम, पूरी ताकत से इसके विरोध में खड़ा रहा। उन्होंने शाहीन बाग जैसे आंदोलनों की पुनरावृत्ति कर देश को अस्थिरता की ओर धकेलने की कोशिश भी की। देशभर में भ्रम फैलाया गया, भावनात्मक और धार्मिक उन्माद को हवा दी गई, ताकि इस विधेयक को सांप्रदायिक रंग देकर इसका मार्ग अवरुद्ध किया जा सके। लेकिन इस बार भारत की जनता इन कुत्सित प्रयासों के पीछे के घिनौने षड्यंत्रों को समझ गई। जनमानस ने स्पष्ट संदेश दे दिया कि देश अब झूठे नैरेटिव, धार्मिक ध्रुवीकरण और जातिगत राजनीति से ऊपर उठ चुका है।
इस विधेयक के समर्थन में केवल बहुसंख्यक वर्ग नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय, विशेषकर पसमांदा मुसलमानों ने भी खुलकर अपनी सहमति व्यक्त की। यह समुदाय वर्षों से वंचना और भेदभाव का शिकार रहा है, जिनके अधिकारों की अनदेखी तुष्टिकरण की कांग्रेसी राजनीति ने की। जब विधेयक पारित हुआ, तो कई स्थानों पर मुस्लिम भाइयों-बहनों द्वारा मिठाइयाँ बाँटना, पटाखे जलाना और जश्न मनाना यह दर्शाता है कि अब समाज का यह वर्ग भी समान अधिकार और पारदर्शी व्यवस्था का सहभागी बनकर भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनना चाहता है।
वक्फ संशोधन विधेयक-2025 के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग पर नियंत्रण लगाया गया है। यह विधेयक सुनिश्चित करता है कि इन संपत्तियों से उत्पन्न आय का लाभ उन लोगों तक पहुँचे जो वास्तव में इसके हकदार हैं। वर्षों से यह संपत्तियाँ एक सीमित वर्ग के लाभ के लिए प्रयुक्त हो रही थीं, जिससे व्यापक मुस्लिम समाज उपेक्षित रह गया था। अब यह संसाधन समाज के कमजोर, वंचित और जरूरतमंद वर्ग के कल्याण के लिए उपयोग में लाए जाएंगे।
यह विधेयक न केवल एक नया कानून है, बल्कि वक्फ के नाम पर चल रहे ज़मीन माफिया गिरोह को ख़त्म करने की दिशा में निर्णायक कदम है। यह घटनाक्रम एक ऐसा भारत के पथ प्रदर्शित करता है जो न्यायसंगत, पारदर्शी और समावेशी है। विपक्ष की यह हार केवल संसद में नहीं हुई, बल्कि जनमत और लोकतांत्रिक परिपक्वता के समक्ष वोट बैंक विचारधारा की यह ज़ोरदार पराजय है। मोदी सरकार ने फिर से सिद्ध कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार की बाहरी या भीतरी धमकियों से डरने वाली नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और समानता के मार्ग पर अडिगता से चलते हुए भारत को प्रमवैभाता के शिखर पर पहुँचने के लिये कृतसंकल्पित है।
लेखक हरियाणा भाजपा के प्रवक्ता हैं
