10 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, पोस्टमार्टम से पता चलेगा मौत का कारण

फरीदाबाद। फरीदाबाद में गहरे बोरवेल में गिरी तीन साल की बच्ची नेहा को करीब 10 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन बाद सोमवार सुबह 4 बजे बाहर निकाला गया। बच्ची के शरीर में कोई हलचल नहीं थी। उसे तुरंत निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बच्ची के शव का पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। इससे उसकी मौत के सही कारणों का पता चलेगा।  बच्ची को बाहर निकालने के लिए हरियाणा पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर जुटी रहीं। एनडीआरएफ के अधिकारी ने बताया कि रविवार रात करीब 8 बजे उन्हें बच्ची के बोरवेल में गिरने की सूचना मिली थी। टीम करीब 9 बजे गाजियाबाद से मौके पर पहुंच गई। उस समय अन्य विभागों की टीमें भी बचाव कार्य में जुटी थीं। नगर निगम की ओर से बोरवेल की गहराई करीब 300 फीट बताई गई थी।

शुरुआत में बचाव दल को बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दे रही थी, लेकिन कुछ देर बाद आवाज आनी बंद हो गई। टीम के साथ लाए गए उपकरण बोरवेल में काम नहीं कर पाए। इसके बाद स्थानीय कार पेंटर की मदद से मौके पर ही एक उपकरण तैयार किया गया। एसडीआरएफ अधिकारियों ने बताया कि बोरवेल कई साल से बंद था। लेकिन 125 फीट की गहराई पर बोरवेल में पानी भरा हुआ था। इससे रेस्क्यू आपरेशन में भी काफी परेशानी आई। बच्ची का सिर नीचे की तरफ था। काफी मशक्कत के बाद टीम ने उसके पैर की मदद से उसे बाहर निकाला। बच्ची करीब 200 फीट से ज्यादा गहराई पर अटकी हुई थी। रविवार शाम तीन साल की नेहा बस्ती के बच्चों के साथ बोरवेल के पास खेल रही थी। इसी दौरान वह खुले बोरवेल में गिर गई।

बच्ची के गिरते ही साथ खेल रहे बच्चों ने शोर मचा दिया। आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और उसके पिता रामदीन को सूचना दी। नेहा के पिता रामदीन मजदूरी करते हैं। हादसे के समय वह काम से वापस लौट रहे थे। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के रहने वाले रामदीन कई साल से सीही गांव में परिवार के साथ रह रहे हैं और यहीं मजदूरी करते हैं। वहीं निगम के कार्यकारी अभियंता संजीव कुमार ने बताया कि करीब 15 साल पहले बोरवेल को ढक्कन लगाकर बंद किया गया था। ढक्कन हटने की जानकारी निगम को नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बच्ची की मौत के बाद सेक्टर-8 के लोगों में निगबम के प्रति गुस्सा है। लोगों का आरोप है कि बोरवेल को अगर पूरी तरह सुरक्षित तरीके से बंद किया गया होता तो यह हादसा नहीं होता।

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