10 अगस्त को जिला स्तर पर चलेगा स्वदेशी सुरक्षा एवं स्वावलंबन अभियान कार्यक्रम

सभी सामाजिक व व्यापारिक संगठन लें बढ़ चढ़ कर भाग

पलवल : स्वदेशी सुरक्षा एवं स्वावलंबन अभियान कार्यक्रम के अंतर्गत पलवल जिले में 10 अगस्त को जागरूक अभियान कार्यक्रम चलाया जाएगा। सामाजिक एवं व्यापारिक संगठनों से कार्यक्रम को सफल बनाने में सहायता ली जाएगी। जिला संयोजक रिशाल सिंह ने बताया कि स्व का भाव लेकर जिले के जागरूक लोग अभियान में बढ़ चढ़ कर भाग लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत देश के लोगों से आह्वान किया है कि देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करें तथा स्वदेशी वस्तुओं का विदेश तक व्यापार करें। अपनी मिट्टी की खुशबू विदेश में भी आनी चाहिए।

संसार में हर छठा व्यक्ति भारतीय है तथा 65 प्रतिशत युवा हैं। ऊर्जा का भंडार देश के युवाओं में है।आज जरूरत है अपनी ऊर्जा को सकारात्मक रूप से स्टार्टअप शुरू करने में लगाएं। प्रसिद्ध कवि एवं लेखन भारतेंदु हरिश्चंद ने लगभग सवा सौ साल पहले लिख दिया था कि “निज भाषा उन्नति अहे, सब उन्नति को मूल बिन निज भाषा ज्ञान के मिटत न हिय को शूल” अन्य कवि ने लिखा है “देश बढ़ेगा अपने पैरों,निज गौरव के भान से” जब भारत परतंत्र था तब अंग्रेजों को नौकर चाहिए थे इसलिए शिक्षा पद्धति को केवल नौकरी की तरफ मोड़ दिया जबकि अंग्रेज खुद सबसे पहले इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति ले आए। आज सोचने का विषय है जब नई ऊर्जा वाले युवा हमारे देश में हैं तो हम आत्मनिर्भर क्यों नहीं हो सकते।

आज जरूरत है प्रेरणा की,उत्साह देने वाले की और वो प्रेरणा हमारे देश के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी दे रहे हैं। अमेरिका जैसे देश नहीं चाहते कि भारत भी आत्मनिर्भर देश बने, भारत भी हथियारों का निर्यातक देश बने। स्वदेशी जागरण मंच पूरे भारत देश में “स्वदेशी सुरक्षा एवं स्वावलंबन” अभियान को जन जन तक पहुंचाना चाहता है। स्वदेशी विचारधारा के भाव को अपनाकर रोजगार सृजन करना होगा। “हर घर स्वदेशी, हर घर उद्यमी” जैसे भाव को अंगीकृत करना होगा। विचारक एवं स्वदेशी जागरण मंच के संस्थापक दंतोपंत ठेंगड़ी जी ने स्वदेशी के भाव को समझा था।

आगे चलकर महात्मा गांधी ने चरखा चलाकर अपने कपड़े बुनकर उदाहरण दिया था कि वह आत्मनिर्भर है। भारत सरकार स्वरोजगार बढ़ाने की योजनाओं पर ध्यान दे रही है मुद्रा लोन जैसी कई योजनाएं दी जा रही हैं। कृषि के क्षेत्र की बात करें तो संसार में सबसे ज्यादा यानी 58 प्रतिशत भू भाग पर भारत में खेती होती है। अपने स्वदेशी बीजों की सुरक्षा करते हुए बाजार की जरूरत के अनुसार खेती पर युवाओं को आगे बढ़ना चाहिए।

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