अच्छे दोस्त सामाजिक कौशल सीखने में भी मदद करते – अनिल मलिक

Good friends also help in learning social skills - Anil Malikगुरुग्राम। हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की राज्यस्तरीय परियोजना के तत्वावधान में आज सेक्टर-50 स्थित आरपीएस इंटरनेशनल स्कूल के किशोर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों हेतू साथियों के दवाब और सोशल मीडिया से निपटना : पारिवारिक गतिशीलता को समझना विषय पर आयोजित सेमिनार को मुख्यवक्ता मंडलीय बाल कल्याण अधिकारी रोहतक एवं राज्य नोडल अधिकारी अनिल मलिक ने कहा कि किसी ख़ास तरीक़े से अच्छा या बुरा व्यवहार करने के लिए महसूस किया जाने वाला आंतरिक या बाहरी दबाव हम-समुदाय के साथियों का दवाब कहलाता है । अच्छी बात यह है

कि हम समूह के साथियों का दबाव सिर्फ़ नकारात्मक ही नहीं सकारात्मक भी होता है और यह तब होता है जब कोई दोस्त दूसरे किशोर युवा दोस्तों को प्रोत्साहित करते हैं जैसे स्कूल और खेल में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए, स्वयं सेवा को प्रोत्साहित करने के लिए, सकारात्मक गतिविधियों में प्रतिभागिता हेतू, नशे और अन्य किसी तरह की जोखिमपूर्ण गतिविधियों से बचाव के लिए । अच्छे दोस्त सामाजिक कौशल सीखने में भी मदद करते हैं जिसमें सक्रिय रूप से सुनना, प्रभावी संवाद, सहानुभूति, समस्या समाधान, टीम वर्क और दूसरों के प्रति सम्मान की भावना ।

साथियों का सकारात्मक दबाव आत्मीयता की भावना आत्मविश्वास और दृढ़ आत्मबोध को बढ़ावा देता है । इसी तरह से सोशल मीडिया के दबाव को भी समझना होगा क्योंकि चौबीसों घंटे सातों दिन इस माध्यम से संदेश प्राप्त करने की सुविधा होती है । ट्रोलिंग के ख़तरे कहीं ना कहीं सोशल मीडिया पर नकारात्मकता बढ़ाते हैं, डिजिटल आदतें ही इस दबाव से बचा सकती हैं । किशोर बच्चों की सुरक्षा हेतु आवश्यक है पारिवारिक गतिशीलता को समझना, उसके लिए जानना यदि कोई बच्चा सोशल मीडिया या हम-समूह के दोस्तों के कारण कुछ ऐसा करने को मजबूर महसूस कर रहा है जो उसे ठीक नहीं लगता तो परिवार के सदस्यों से बात करके उनका समर्थन हासिल करते हुए उचित मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए ।

परिवार सुरक्षित व सहायक माहौल प्रदान कर सकता है जहाँ किशोर अपनी मन में उत्पन्न भावनाओं को बिना किसी डर के खुलकर व्यक्त कर सकते हैं । सुरक्षित वातावरण, समर्थक मार्गदर्शन, खुली बातचीत, सकारात्मक दृष्टिकोण, निर्धारित तय सीमाएं, सकारात्मक संबंध निर्माण, उदाहरणों की प्रस्तुति, पारिवारिक गतिशीलता में मदद कर सकती है । परामर्शदाता नीरज कुमार ने कहा कि मनोविज्ञानिक परामर्श सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ निरंतरता क़ायम रख कर ही हासिल किया जा सकता है ।

कार्यक्रम की संयुक्त अध्यक्षता करते हुए मंडलीय बाल कल्याण अधिकारी कमलेश शास्त्री एवं स्कूल प्रिंसिपल पूजा शर्मा ने कहा कि मनोविज्ञानिक प्रेरणा ही वो रास्ता है जिससे प्रोत्साहित होकर बच्चे मन की बात साँझा कर सकते हैं, समस्या निदान के लिए ज़रूरी है समस्या का सच्चाई के साथ वर्णन । कार्यक्रम में विशेष उपस्थिति जिला बाल कल्याण अधिकारी सुरेखा हुड्डा, कार्यक्रम अधिकारी नीलम दलाल, सहायक कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र तथा राज्य बाल कल्याण परिषद के आजीवन सदस्य नीरज कुमार, स्कूल कॉर्डिनेटर करण मखीजा इत्यादि की रही ।

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