भक्ति और शक्ति का संगम बनी “भक्ति-शक्ति यात्रा”: पलवल बना सांस्कृतिक जागरण का साक्षी: अनिल जाँगडा
पलवल में गूंजा आध्यात्मिक स्वर: ‘भक्ति-शक्ति यात्रा’ का भव्य आयोजन
भक्ति और शक्ति का अद्वितीय संगम: सांस्कृतिक चेतना का नया अध्याय पलवल में गूंजा आध्यात्मिक स्वर: ‘भक्ति-शक्ति यात्रा’ का भव्य आयोजन : अनिल जाँगडा
जनजागरण से जनकल्याण की ओर: भक्ति-शक्ति यात्रा का उद्देश्य और प्रभावआस्था,स्कृति और ऊर्जा का संगम: ‘भक्ति-शक्ति यात्रा’ ने पलवल को किया आलोकित
महिला सशक्तिकरण के प्रतीक रूप में शक्ति यात्रा
सांस्कृतिक जागरण की मशाल: पलवल में जागी नई ऊर्जा
धर्म, अध्यात्म और सामाजिक चेतना की त्रिवेणी: भक्ति-शक्ति यात्रा का विश्लेषण
परंपरा और नवचेतना का मेल: ‘भक्ति-शक्ति यात्रा’ का सामाजिक प्रभाव
नारी शक्ति और भक्तिभाव: एक सांस्कृतिक आंदोलन की झलक
पलवल की ऐतिहासिक धरती पर अध्यात्म और संस्कृति का पुनर्जागरण : अनिल जाँगडा
पलवल, 5 मई 2025
सनातन संस्कृति के आलोक को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से निकली “भक्ति-शक्ति यात्रा” ने पलवल को भक्ति, सेवा और समरसता के रंग में सराबोर कर दिया। हिमाचल प्रदेश के ज्वालामुखी मंदिर से प्रज्ज्वलित ज्वालामाता की अखंड ज्योति को लेकर चल रही यह राष्ट्र जागरण यात्रा मध्यप्रदेश के पशुपतिनाथ मंदिर, धुरेल राजगढ़ (बालोतरा) की ओर अग्रसर है।
यह यात्रा एक धार्मिक आंदोलन ही नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक जागरण है — जो हमें हमारे प्राचीन गौरवशाली मूल्यों की ओर लौटने का आमंत्रण दे रही है। ज्वालामाई भक्ति के साथ शक्ति का प्रतीक हैं। यह यात्रा उन्हीं के स्वरूप का अनुसरण करते हुए, समाज में फिर से मंदिरों को धर्म, शिक्षा, सेवा, स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता के केंद्र के रूप में स्थापित करने की प्रेरणा दे रही है।
यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का अभियान है। यह भारत की उस गौरवशाली परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास है, जहाँ मंदिर केवल पूजन के स्थल नहीं, अपितु शिक्षा, विज्ञान, नीति निर्माण, समाजसेवा और राष्ट्रनिर्माण के प्रेरणाकेंद्र रहे हैं।
जब वर्तमान युग में समाज भौतिकता की ओर अग्रसर होते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों से कटता जा रहा है, ऐसे में यह यात्रा लोगों को यह स्मरण करवा रही है कि संस्कृति कोई बीता हुआ अध्याय नहीं, बल्कि वर्तमान की शक्ति और भविष्य की दिशा है। यह यात्रा समाज में धार्मिक चेतना, सेवा भावना, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समरसता का संदेश लेकर चल रही है। इसका उद्देश्य मंदिरों को केवल पूजा केंद्र नहीं, बल्कि शिक्षा, सेवा, स्वास्थ्य और संस्कार के केंद्रबिंदु बनाना है।
पलवल में हुआ ऐतिहासिक स्वागत: यात्रा का स्वागत पलवल नगर में हुड्डा सेक्टर-2 से हुआ, जहाँ पूर्व विधायक श्री दीपक मंगला, विभिन्न संत महात्माओं, धर्माचार्यों, मातृशक्ति, युवा वर्ग और नगरवासियों ने मिलकर भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने बाइकों द्वारा यात्रा का पायलट करते हुए हुड्डा चौक से प्राचीन देवी मंदिर, कमेटी चौक भवन कुंड होते हुए चमेली वन मंदिर तक यात्रा का मार्गदर्शन किया।
संतों के पथ-प्रदर्शन में आध्यात्मिक चेतना का जागरण पाथेय-भक्ति-शक्ति यात्रा को आध्यात्मिक ऊर्जा और दृष्टि देने वाले अनेक पथ प्रदर्शक संत-महापुरुषों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, जिनमें प्रमुख रूप से -महंत डॉ. विलासनाथ जी महाराज, जगदेव बाबा हरजीत सिंह जी (सुल्लुपुर), महंत ब्रजीनाथ जी महाराज, महंत अनंतनाथ जी, स्वामी वीर सिंह हिलकांडी जी महाराज, महंत योगी लक्ष्मणनाथ जी महाराज, महंत श्री नारायण गिरि जी महाराज, महामंडलेश्वर श्री रूपेश प्रकाश जी, साध्वी प्राची आर्य जी, डॉ. योगी सोहनलाल जी एवं अन्य संतजन इन संतों की उपस्थिति ने यात्रा को एक धार्मिक चेतना के पुनर्जागरण और मंदिरों को समाज-निर्माण के केंद्र बनाने की दिशा में प्रेरित किया। यह यात्रा किसी संगठन विशेष की नहीं, हर धर्मप्रेमी नागरिक की यात्रा है। यही कारण है कि इसमें पलवल के सभी सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक संगठनों, मंदिर प्रबंध समितियों, पुजारियों, सेवा संगठनों और श्रद्धालुजनों से सहभागिता का आह्वान किया गया है। हम सब इस ऐतिहासिक यात्रा के स्वागत, सत्कार व सेवा में सहभागी बनें, यही धर्म है, यही पुण्य है।
सामाजिक सहभागिता और संस्थागत योगदान: पलवल में इस यात्रा के आयोजन, स्वागत और सेवा कार्यों में कई सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने सक्रिय योगदान दिया। प्रमुख रूप से:, जिला सामाजिक समरसता मंच, पलवल, श्री हनुमान मंदिर समिति, प्राचीन देवी मंदिर सेवा समिति, भवन कुंड, भारतीय शक्ति संगठन, पलवल, गायत्री परिवार, पलवल, विहिप, बजरंग दल एवं अन्य धर्म-संस्कृति संगठन, युवा भारत मंच, महिला कीर्तन मंडली एवं मातृशक्ति संगठन, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, पलवल, कृष्णा स्वीट्स, पलवल, इन सभी संगठनों ने स्वागत, सत्कार, भंडारा, सुरक्षा, प्रचार-प्रसार और नागरिक सहभागिता की व्यवस्था को भव्य रूप में संपन्न किया। अभिनंदन के अधिकारी समर्पित कार्यकर्ता: इस यात्रा की सफलता में जिन समर्पित कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का योगदान सराहनीय रहा, उनमें शामिल हैं: के. पी. सिंह, सह-जिला संघचालक आरएसएस, वेद प्रकाश, विभाग कार्यवाह आरएसएस, प्रवीण गर्ग, नगर संचालक आरएसएस, त्रिलोक जिला कार्यवाह आरएसएस, संजीव तायल, विभाग संयोजक सामाजिक समरसता मंच,धीरज मंगला जिला अध्यक्ष विश्व हिन्दू परिषद् , हेमंत वर्मा जिला संयोजक सामाजिक समरसता मंच, गौरव भार्गव, नगर संयोजक सामाजिक संस्था मंच, अनिल कुमार जांगड़ा मीडिया प्रमुख सामाजिक समरसता मंच, वीरेंद्र पाल सिंह जिला मंत्री विश्व हिंदू परिषद,सतीश कुमार जिला शारीरिक प्रमुखआरएसएस, अशोक बघेल, अजय आरएसएस, देवेंद्र वत्स, ओमप्रकाश सैनी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के समर्पित कार्यकर्ता के इन सभी के समन्वित नेतृत्व और सतत सेवाभाव के कारण यह यात्रा श्रद्धा, व्यवस्था और जनसहभागिता के हर मानक पर सफल रही।
यात्रा: जन-जन की और जन-मन की: जैसा कि एक दीप से अनेक दीप जलते हैं, वैसे ही यह यात्रा हर गली, हर मोहल्ले और हर हृदय को आलोकित कर रही है। यह किसी संगठन विशेष की नहीं, हर धर्मप्रेमी नागरिक की यात्रा है।
अंततः, यह यात्रा एक सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुकी है। हर घर में एक दीप जलाएं, हर हृदय में ज्वाला जागाएं। मंदिरों को पुनः समाज का प्राण बनाएं।
आइए! हम सब मिलकर यह सुनिश्चित करें कि ज्योति से ज्योति जलती रहे, यह संस्कृति, यह चेतना, यह श्रद्धा हर गली, हर मोहल्ले तक पहुंचे। यह सनातन मूल्यों को पुनर्स्थापित करने, मंदिरों को समाज निर्माण का केंद्र बनाने और भारत के आत्मबोध को जागृत करने की दिशा में एक प्रभावशाली प्रयास
