पानी की सुरक्षा पर मंडराता खतरा: सकेतड़ी का बूस्टिंग स्टेशन बना असामाजिक तत्वों का अड्डा, ग्रामीणों में गहरा रोष

पंचकूला । ग्राम सकेतड़ी स्थित 700 के.एल. क्षमता वाला बूस्टिंग स्टेशन इन दिनों गंभीर लापरवाही और अव्यवस्था के कारण असामाजिक तत्वों का ठिकाना बनता जा रहा है।

जल आपूर्ति जैसी अत्यंत संवेदनशील व्यवस्था पर मंडराते इस खतरे को लेकर गांववासियों में गहरी चिंता और भारी आक्रोश व्याप्त है।

ग्रामीणों के अनुसार, बूस्टिंग स्टेशन पर तैनात कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति नहीं रहती, जिससे परिसर असुरक्षित बना हुआ है।

इस स्थिति का फायदा उठाकर अज्ञात लोग यहां आकर डेरा जमाए रहते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि परिसर में नशा करना, शराब पीना और अन्य संदिग्ध गतिविधियां आम हो चुकी हैं। इससे गांव में असुरक्षा का माहौल बन रहा है और छोटी आपराधिक घटनाओं में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

सबसे गंभीर चिंता जल स्रोत की सुरक्षा को लेकर व्यक्त की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी प्रकार लापरवाही जारी रही तो कोई भी असामाजिक तत्व पानी में नशीले या जहरीले पदार्थ मिलाकर बड़ी अनहोनी को अंजाम दे सकता है।

ऐसी स्थिति पूरे गांव के स्वास्थ्य और जीवन के लिए घातक सिद्ध हो सकती है।
गांव में स्थित सकेतड़ी क्षेत्र का प्राचीन एवं प्रसिद्ध भोले बाबा मंदिर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। ऐसे में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी बन जाती है।
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि आस्था और स्वास्थ्य दोनों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस संबंध में ग्राम के नंबरदार गुरुतेज सिंह (भोला) ने बताया कि उन्होंने कई बार संबंधित विभागीय अधिकारियों एवं पूर्व पार्षद को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया है, लेकिन अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो स्थिति और अधिक गंभीर रूप ले सकती है।

ग्रामीणों के अनुसार, बूस्टिंग स्टेशन से जुड़े कर्मचारी सुभाष शर्मा, जेई इंद्रजीत तथा एसडीओ धर्मेंद्र को भी लगातार स्थिति की जानकारी दी जा रही है, परंतु अब तक अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।

ग्रामवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि बूस्टिंग स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था तत्काल प्रभाव से सुदृढ़ की जाए, नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए, सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं तथा असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे सामूहिक रूप से उच्च अधिकारियों से मिलकर आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। गांव की सुरक्षा, श्रद्धालुओं की आस्था और स्वच्छ पेयजल व्यवस्था के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही अब स्वीकार्य नहीं है।

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