बिजली निजीकरण, स्मार्ट मीटरिंग के खिलाफ होगा देशव्यापी आंदोलन : सुभाष लांबा
फरीदाबाद। इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईईएफआई) ने बिजली क्षेत्र में प्रस्तावित नीतिगत बदलावों, बिजली (संशोधन) विधेयक, श्रम संहिताओं, एग्रीकल्चर डिस्कॉम तथा कर्मचारियों के अधिकारों पर बढ़ते हमलों के विरुद्ध व्यापक जन-जागरूकता एवं संघर्ष कार्यक्रम चलाने का निर्णय लिया है। यह फैसला बृहस्पतिवार को भकना भवन, चंडीगढ़ में आयोजित इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया की उत्तरी क्षेत्र की बैठक में लिया गया। फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं एनएचपीसी वर्कर यूनियन के राज्य प्रधान सुरेश राठी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश,उप्र, राजस्थान, उत्तराखंड व यूटी चंडीगढ़ के पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में सर्वसम्मति से हरियाणा में एग्रीकल्चर डिस्कॉम बनाने और स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के फैसले की कड़ी निन्दा की और इसके खिलाफ राष्ट्रव्यापी जन जागरण अभियान चलाने का फैसला लिया।
बैठक में इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा, सुरेश राठी, कार्यालय सेकेट्री जय प्रकाश शर्मा, शब्बीर अहमद गनी, सुरेन्द्र यादव, अवतार सिंह, प्रदीप कुमार,गोपाल दत्त जोशी, नीतेश कुमार,अमरीक सिंह व संजीव ढांडा आदि मौजूद थे। इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने बैठक में ऐलान किया कि बिजली निजीकरण, स्मार्ट मीटरिंग के खिलाफ और पुरानी पेंशन,ठेका कर्मियों की रेगुलराइजेशन आदि मांगों को लेकर होगा देशव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि फेडरेशन का मानना है कि बिजली क्षेत्र में लागू की जा रही नीतियाँ न केवल कर्मचारियों और ठेका श्रमिकों के हितों को प्रभावित करेंगी, बल्कि देश के करोड़ों उपभोक्ताओं और किसानों पर भी गंभीर प्रभाव डालेंगी। इसलिए इन मुद्दों को केवल कर्मचारी हित का प्रश्न न मानकर जनहित का विषय समझना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि फेडरेशन ने निर्णय लिया है कि देशभर में अपने सदस्यों, बिजली कर्मचारियों और आम उपभोक्ताओं के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ताकि उपभोक्ताओं विशेषकर किसानों को इन नीतियों के दूरगामी प्रभावों से अवगत कराया जा सके। उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर कर्मचारियों की समस्याओं, श्रम संहिताओं, ठेका कर्मचारियों की नियमितिकरण, एग्रीकल्चर डिस्कॉम व स्मार्ट मीटरिंग पर लोक,वेतन पुनरीक्षण तथा पुरानी पेंशन योजना (ह्रक्कस्) जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर जुलाई माह में दो सप्ताह का विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसका समापन अगस्त 2026 में राज्य बिजली विभागों के मुख्यालयों के समक्ष विशाल धरना-प्रदर्शन के रूप में होगा।
इन कार्यक्रमों में कर्मचारियों के परिवार, छात्र, युवा, महिलाएँ तथा किसान संगठनों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश राठी व हीरा लाल वर्मा ने बताया कि फेडरेशन ने ठेका कर्मचारियों की समस्याओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लेते हुए 31 अगस्त 2026 तक राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित करने का भी आह्वान किया है। इन सम्मेलनों के माध्यम से आगे की संघर्ष रणनीति तैयार की जाएगी और आवश्यक होने पर अक्टूबर / नवंबर 2026 में बिजली क्षेत्र के ठेका कर्मचारियों की एक दिवसीय राष्ट्रीय हड़ताल आयोजित की जाएगी। बैठक में बिजली कर्मचारी नेता रघुवीर सिंह, राजबीर सिंह, प्रशांत कुमार,प्रेम गौतम, सुखविंदर सिंह सिद्धू, गुरमीत सिंह,विनय प्रसाद व वीरेंद्र सिंह आदि मौजूद थे।
