संगीत के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान को हर घर तक, हर बच्चे तक, समाज के हर वर्ग तक पहुंचना ही एकमात्र लक्ष्य है – सजन जी सतयुग दर्शन ट्रस्ट
आध्यात्मिक क्रान्ति के तहत- सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र द्वारा सतयुग संगीत उत्सव 2024 ग्रांड फिनेले बड़े ही धूमधाम से मनाया गया l
इस अवसर पर सतयुग दर्शन ट्रस्ट के मार्गदर्शक श्री सजन जी, मैनेजिंग ट्रस्टी श्रीमती रश्मा गांधी जी , सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र की चेयरपर्सन श्रीमती अनुपमा तलवार जी, मोहित नारंग जी, देश राज बंगा जी,प्रोफेसर राम पाल बंगा, बूटा मुहम्मद, एआईजी/एसटीएफ जगजीत सिंह सरोया रेंज जालंधर
राज कुमार साकी निर्देशक, निर्माता, मीडिया प्रमोटर प्राचार्य दीपेंद्र कांत ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की इस अवसर पर श्रीमान रमन अरोड़ा एम एल ए जालंधर सेंट्रल, उन्हीं के साथ पूर्व एम एल ए हरजिंदर वेरी , पूर महापौर जगदीश राज राजा, प्रसिद्ध गायक बूटा मोहम्मद म्यूजिक प्रोफेसर रामपाल बंगा , राज कुमार मदान आप नेता , ए सी पी अशोक कुमार पंजाब पुलिस ,डॉ प्रीत मोहिंदर सिंह होशियारपुर से, शुभम शर्मा डायरेक्टर गवर्मेंट पंजाब उपस्थित रहे l
इस अवसर पर चेयरपर्सन श्रीमती अनुपमा तलवार जी ने अपने वक्तव्य में सभी प्रतिभागियों को कहा कि आप अपने जीवन में अमूल्य गुणों को भी आत्मसात करें सच बोलें, मानवीय मूल्य धारण करें।संगीत सीखने के साथ-साथ अपने जीवन में छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें कि आपके माध्यम से किसी को दुख ना हो, आप अपने माता-पिता का सम्मान करें, आप अपने आसपास जितने लोग हैं उन सभी का सम्मान करें, प्रतिदिन मेहनत करेंl
प्राचार्य दीपेन्द्र कांत ने बताया कि सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र की संपूर्ण भारत में 20 शाखाएं संगीत के क्षेत्र में कार्यरत हैं जहां पर विभिन्न प्रकार की गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। इसके अतिरिक्त संगीत कला केंद्र प्रयाग संगीत समिति प्रयागराज से मान्यता प्राप्त हैं । प्रतिवर्ष यहां से हजारों विद्यार्थी परीक्षा देकर अपने प्रमाण पत्र प्राप्त करते हैं और यह प्रमाण पत्र उनको जीवन में आगे बढ़ने में काम आते हैं। वर्ष 2005 से अब तक 10000 से अधिक बच्चों ने संगीत की शिक्षा प्राप्त की है।
इस अवसर पर मार्गदर्शक श्री सजन ज़ी ने अपने वक्तव्य में सभी को नेक बनने के लिए कहा यदि इस समाज को बेहतर बनाना है तो अपने आपको सुधरना होगा, सबको ईश्वर प्रदत्त गुण समझने होंगे lजैसा कि कलयुग जा रहा है सतयुग आने वाला है उस सुनहरी युग के आगमन में हम सबको नेक इंसान बनने के लिए प्रेरित होना होगाl जैसा उस ईश्वर ने हमें बनाकर भेजा था वैसे ही गुण हमें विकसित करने होंगे..नेक मानव बनने हेतु बताया कि फरीदाबाद स्थित सतयुग दर्शन वसुंधरा परिसर में स्थापित ध्यान-कक्ष वास्तव में भौतिक ज्ञान से भिन्न, आत्मिक ज्ञान प्रदान करने वाला समभाव समदृष्टि का स्कूल है।
यहाँ से बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग के सदस्य को सतयुगी उत्कृष्ट नैतिक संस्कृति से परिचित करा, समभाव समदृष्टि की युक्ति अनुसार आपस में मैत्री भाव से विचरने की शिक्षा प्रदान की जाती है ताकि समाज में फैला हुआ भिन्नता का,लड़ाई-झगडे का, वैर-विरोध का, द्वि-द्वेष का वातावरण समाप्त हो और सब आपस में मिलजुल कर शांति से रहते हुए सुखमय जीवन व्यतीत कर सकें। इसके अतिरिक्त सबको समभावी, समचित्त, समबुद्धि व समदृष्ट इन्सान बनाने हेतु आध्यात्मिक क्रान्ति चल रही है। इस आध्यात्मिक क्रान्ति के तहत् हर आत्म-विस्मृत मानव को, विधिवत् आत्मिकज्ञान प्रदान कर, पुन: आत्म-स्मृति में लाने का प्रयास ज़ोरों-शोरों से चल रहा है ताकि वैश्विक-स्तर पर हर मानव विचार, सत्-ज़बान, एक-दृष्टि, एकता अपनाकर अपनी श्रेष्ठता के अनुरूप मन-वचन-कर्म द्वारा सजन पुरुष बनने में सक्षम बन सके।
मानव-जाति को पुनः सुमति में लाने के लिए त्रेता, द्वापर व कलियुग की बातें व आचार-संहिता छोड़कर, जो युग अब आने वाला है यानि सतयुग की सर्वोत्कृष्ट संस्कृति यानि आचार-संहिता अपनाने का विधिवत् सुझाव दिया जा रहा है ताकि सबका चारित्रिक रूप सतयुग की पहचान व मानवता का स्वाभिमान बन सके और मानव पुन: अपनी उत्कृष्ट यथार्थ शान को प्राप्त हो सत्यमेव जयते के कथन को सत्य सिद्ध कर सके। इस तरह विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से इस स्टाल के सदस्यों द्वारा सबको उत्कृष्ट इन्सान बनने हेतु निवेदन किया जा रहा और कहा जा रहा है कि आत्मिक ज्ञान प्राप्तकर, आत्मिक गुण यानि सन्तोष-धैर्य अपनाकर सच्चाई धर्म की राह पर दृढ़ता से चलने का संकल्प लो और सच्चे दिल से कुदरती वेद-शास्त्र विदित ईश्वरीय आज्ञाओं के पालन के निमित्त आत्म-समर्पण करने का पुरुषार्थ दिखाओ और इस धरा पर पुन: सतयुग जैसा उत्तम समयकाल ले आओ। यही नहीं सबको यह भी सुझाव दिया जा रहा है कि इस हेतु काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार जैसे भाव-स्वभाव छोड़ व निष्कामता अपनाकर मानव-धर्म को सत्यनिष्ठा से अपने मन-वचन-कर्म द्वारा प्रतिष्ठित कर परोपकारी बनने का साहस दिखाओ क्योंकि तभी सम्पूर्ण मानव-जाति ‘वसुधैव कुटुम्बकम्‘ की अवधारणा को चरितार्थ कर एक सत्यनिष्ठ व धर्मपरायण संगठित परिवार की तरह मिल जुल कर रहने के योग्य बन पाएगी और ब्रह्म अवस्था को धारण कर यानि एकता, एक-अवस्था में आ अपने जीवन के परम लक्ष्य यानि मोक्ष को सिद्ध कर सकेगी।
इवेंट इंचार्ज रविन्द्र सचदेवा ने बताया कि प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को 5100/- द्वितीय को 3100 /- एवं तृतीय को 2100/- धनराशि पुरूस्कार स्वरुप दिए गए ll
सभी विजेताओं को बधाई देते हुए मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवम इस प्रतियोगिता से जुड़े सभी लोगों का धन्यवाद किया।
मंच संचालन नवीन नागिया
एवम मोनिका भाटिया ने किया।
इस अवसर पर सतयुग दर्शन ट्रस्ट के सभी सदस्य अशोक सिक्का, अनूप बिंद्रा, नरेंद्र चड्डा, सुमित सिक्का, मीना सिक्का, सुमित सिक्का राजीव नागपाल, यतींन सिक्का,संतोष सेठी, अशोक सेठी, सुरेंद्र मदान, नवीन,सुनील नारंग, गौतम नारंग, अरुण भाटिया, प्रिंस छावढ़ा, हरीश जी, ढल सजन ज़ी आदि सदस्य
उपस्थित रहे ।
मंच संचालन का कार्यभार नवीन नागिया ने सम्भाला l



