डीसी कार्यालय के कर्मचारी जुबेर पर करहैड़ा गांव के सरपंच ने लगाए भ्रष्टाचार व जातिसूचक गालियां देने के आरोप
फर्जी मुकदमे में फसाने व सात लाख रुपए की रिश्वत राशि हड़पने के भी लगाए सरपंच ने लगाए आरोप
नूंह, आस मोहम्मद
नूंह जिले के करहैड़ा गांव के सरपंच रामपाल सहित गांव के सैकड़ो लोगों ने नूंह डीसी कार्यालय में कर्मचारी जुबेर खान पर भ्रष्टाचार के साथ-साथ जाति सूचक गालियां देते हुए फर्जी मुकदमों में फसाने का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं सरपंच ने इस की शिकायत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग व अन्य अधिकारियों को देकर डीसी कार्यालय के कर्मचारी जुबेर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
सरपंच ने आयोग को दी गई शिकायत में बताया है कि उन्होंने वर्ष 2022 में सरपंची का चुनाव जीता था। चुनाव के बाद उनके प्रतिद्वंदी राजवीर ने शैक्षणिक दस्तावेजों को लेकर शिकायत की थी। रामपाल ने आरोप लगाया है की जांच को उनके पक्ष में करने के लिए फिरोजपुर झिरका एसडीएम कार्यालय में तैनात तत्कालीन जुबेर नाम के कंप्यूटर ऑपरेटर ने उनसे 7 लाख रुपए की रिश्वत ली।
रामपाल ने बताया कि जब काफी समय तक जांच पूरी नहीं हुई तो रामपाल ने जुबेर से अपने पैसे वापस मांगे जिस पर तत्कालीन एसडीएम स्टेनो जुबेर खान पैसा लौटाने के लिए टालमटोल करता रहा।
उन्होंने जब काम नहीं होने पर जुबेर से पैसा देने के लिए दबाव बनाया तो रामपाल ने बताया कि 5 फरवरी 2025 को जुबेर ने उन्हें अपने फार्म हाउस फिरोजपुर झिरका बुलाया और अगले दिन सुबह आने को कहा। 6 फरवरी को रामपाल अपने ग्राम सचिव हसीन के साथ जुबेर के फार्म हाउस पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि जुबेर ने पहले से ही विजिलेंस की टीम को वहां बुला रखा था और उनके साथ साजिश रचते हुए ग्राम सचिव हसीन को तीन लाख रुपए दिए और तुरंत विजिलेंस से पकड़वा दिया। जबकि वह पैसे रामपाल के थे जो जुबेर को रिश्वत में दिए गए थे। रामपाल का कहना है कि जुबेर ने उन्हें जाति सूचक गालियां देकर अपमानित किया, जब रामपाल ने पैसे वापसी की मांग की तो जुबेर ने धमकाया और फर्जी मुकदमे में फंसाने की भी धमकी दी।
शिकायतकर्ता रामपाल ने यह भी दावा किया है कि गुड़गांव विजिलेंस द्वारा की गई जांच पक्षपाती और अधूरी है। उन्होंने यह भी लिखा है कि खुद जुबेर अहमद ने स्वीकार किया है कि उसे वह पैसे उपमंडल अधिकारी को देने के लिए रामपाल के पक्ष में जांच करवाने के लिए मिले थे और वह 3 महीने से ज्यादा समय से इन पैसों को अपने पास रखे हुए था।
रामपाल ने आयोग से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए। जुबेर अहमद के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर उनके सात लाख रुपए उन्हें लौटाएं जाए और उनके ऊपर लगे फर्जी आरोपों को भी हटाया जाए। सरपंच ने आरोप लगाया है कि उन्हें अनुसूचित जाति का होने के चलते मानसिक सामाजिक आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया गया है और उनको पूरी तरह परेशान किया गया है।
आय से अधिक सम्पत्ति की भी जांच की मांग।
करहैड़ा गांव के सरपंच रामपाल ने जुबेर खान पर आरोप लगाते हुए कहा है कि जुबेर ने एसडीएम कार्यालय में बतौर कंप्यूटर ऑपरेटर रहते हुए काफी संपत्ति अर्जित की है। उन्होंने बताया है कि जिस कर्मचारी की मासिक आय बीस से 30000 रुपए के बीच में है। आज उनके पास करोड़ों रुपए का फार्म हाउस, लग्जरी गाड़ियां वह जगह-जगह प्लाट लिए हुए हैं। इतना ही नहीं वह कई बार विदेशी यात्राएं भी कर चुके हैं। जिससे उनकी इस संपत्ति की जांच की जाए। रामपाल सरपंच ने आरोप लगाया कि यह अवैध रूप से कमाई गई संपत्ति है जो रिश्वतखोरी में ली गई रकम से अर्जित की गई है। उन्होंने कहा कि अभी इस मामले में और खुलासा होने हैं जिसका वह मीडिया के सामने जल्द खुलासा करेंगे।
