गोकुलधाम सोसायटी के विरोध में उतरे लोग,बिजली-पानी को लेकर जताई चिंता

फरीदाबाद। सेक्टर-55 के लोगों ने रविवार को गोकुलधाम सोसायटी के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि गोकुलधाम सोसायटी का बिजली, पानी और सीवर का अतिरिक्त भार सेक्टर-55 के संसाधनों पर नहीं डाला जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे भविष्य में सेक्टर-55 के निवासियों को बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। प्रदर्शन के दौरान हरियाणा प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स महासंघ के प्रदेश महासचिव एवं फीवा के कार्यवाहक जिला महासचिव सरदार गुरमीत सिंह देओल ने कहा कि सेक्टर-55 के लोगों का विरोध किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के हितों और नागरिक सुविधाओं की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि यदि गोकुलधाम सोसायटी का अतिरिक्त बिजली लोड सेक्टर-55 के मौजूदा फीडर पर डाला गया तो इसका सीधा असर यहां रहने वाले हजारों लोगों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सेक्टर-55 की बिजली, पानी, सीवर, सडक़ और सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही दबाव में है। ऐसे में किसी भी नई सोसायटी का अतिरिक्त भार डालने से पहले पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सेक्टर के हितों की अनदेखी की गई तो निवासी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे।

प्रदर्शन के दौरान लोगों ने सेक्टर-55 की 60 फुट रोड पर भारी और बाहरी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने तथा सेक्टर-25 से प्रतापगढ़ पुल तक गुडग़ांव नहर के दोनों किनारों पर सडक़ निर्माण की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि इससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा और लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलेगी। प्रदर्शन के दौरान करीब 50 से 60 स्थानीय लोग एकत्र होकर अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करते रहे। मौके पर सेक्टर-55 चौकी पुलिस की टीम भी मौजूद रही। सेक्टर-55 चौकी के एएसआई मोहनलाल ने बताया कि सभी लोगों का विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को अपनी मांगों के संबंध में प्रशासन से बातचीत करने के लिए समझाया गया, जिसके बाद मामला शांत हो गया। प्रदर्शनकारियों ने सेक्टर-55 के सभी निवासियों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि क्षेत्र के हितों की रक्षा के लिए सभी को मिलकर आवाज उठानी होगी। उनका कहना था कि यदि जरूरत पड़ी तो ज्ञापन, बैठक, शांतिपूर्ण धरना और अन्य लोकतांत्रिक माध्यमों से भी अपनी मांगों को सरकार और प्रशासन के सामने रखा जाएगा।

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