“हमारा संविधान हमारा गौरव”पुस्तक का विमोचन

नई दिल्ली |  जब कोई राष्ट्र अपने संविधान को केवल कानून की पुस्तक नहीं, बल्कि जीवन-मूल्यों का पवित्र ग्रंथ मानता है, तब लोकतंत्र वास्तव में जीवंत हो उठता है। इसी भावभूमि पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आई.जी.एन.सी.ए.), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के जनपद सम्पदा विभाग द्वारा आपकी अपनी पुस्तक चर्चा श्रृंखला ‘ज्ञानपथ’ के अंतर्गत पुस्तक “हमारा संविधान – हमारा गौरव” का विमोचन एवं विचार-परिसंवाद आयोजित किया गया।

यह आयोजन शब्दों से अधिक अनुभूति का था—जहाँ संविधान को अधिकारों की मात्र सूची नहीं, बल्कि धर्म, कर्तव्य और करुणा से जुड़ा जीवन-दर्शन बताया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन से करते हुए विशिष्ठ अतिथि विक्रांत खण्डेलवाल , क्षेत्रीय संगठन मंत्री, भारत विकास परिषद ने कहा कि भारतीय संविधान हमारी सभ्यता की चेतना है, जो सहस्राब्दियों की सांस्कृतिक यात्रा से निकलकर आधुनिक भारत की आत्मा बना है। उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि संविधान भारत के प्रत्येक नागरिक को समान गरिमा प्रदान करता है। जब संविधान को श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है और आचरण में उतारा जाता है, तभी राष्ट्र सशक्त और समृद्ध बनता है। उन्होंने भारतीय संविधान के प्रति जागरूकता के इस अभियान को स्कूलों में विद्यार्थियों के माध्यम से आगे बढ़ाने का आव्हान किया !

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में दिल्ली नगर निगम के उप-महापौर श्री जय भगवान यादव एवं शिक्षा समिति के अध्यक्ष श्री योगेश वर्मा उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने संविधान को भारत की आत्मिक एकता और लोकतांत्रिक चेतना का सूत्र बताया।

पुस्तक के लेखक श्री मुकेश भारद्वाज ने कहा कि यह कृति संविधान को केवल समझने का नहीं, बल्कि उसे जीने का आग्रह है। उनके अनुसार, जब नागरिक अपने कर्तव्यों को धर्म मानकर निभाते हैं, तब संविधान स्वयं बोलने लगता है।

जनपद सम्पदा विभाग, आई.जी.एन.सी.ए. के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अनिल कुमार ने अपने स्वागत वक्तव्य में ‘ज्ञानपथ’ श्रृंखला को राष्ट्रबोध, विवेक और चेतना का मार्ग बताया।
उन्होंने संविधान को सामाजिक समरसता और न्याय का आध्यात्मिक आधार बताते हुए कहा कि भारतीय संविधान ने अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी अधिकार और आत्मसम्मान की आवाज़ दी है—यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है।

कार्यक्रम में अनेक शिक्षाविदों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं , सहयोग कर्ताओ को भी सम्मानित किया गया।
1.​श्रीमती अनीता शर्मा, वरिष्ठ शिक्षाविद और इस पुस्तक की मागर्दर्शक
2.​श्री दिनेश राणा, निदेशक श्रीराम शिक्षा मंदिर स्कूल
3.​श्रीमती श्रीमती अनुपमा भारद्वाज प्रिंसिपल जैन मृगावती पब्लिक स्कूल
4.​श्रीमती सिम्मी भाटिया, प्रधानाचार्या, सेंट मार्गरेट सीनियर सेकेंडरी स्कूल
5.​श्रीमती मोना रस्तोगी, प्रधानाचार्या, सचदेवा पब्लिक स्कूल
6.​श्री अवधेश झा, प्रधानाचार्य, सर्वोदय विद्यालय, सेक्टर–8, रोहिणी
7.​श्रीमती नितिशा यादव, प्रधानाचार्या, इंद्रप्रस्थ कॉन्वेंट स्कूल, बेगमपुर, दिल्ली
8.​श्रीमती हेमा चौहान, प्रधानाचार्या, जी.आर. इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, पूठ खुर्द,
9. श्रीमती अंजू मेहरोत्रा प्रिंसिपल कालका पब्लिक स्कूल
10.​श्री जय भगवान गोयल, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य, शिक्षा विभाग, दिल्ली सरकार
श्री देवेंद्र शर्मा, अशोक सुरक्षा हाउसकीपिंग सर्विस, सोनीपत
12 .​श्री वीरेंद्र स्वरूप, पुष्प लॉजिस्टिक्स, गुरुग्राम
13.​श्री नरसिंह सेहरावत, सेवानिवृत्त डैनिक्स अधिकारी
14.​श्री रविंद्र सिंगल, समाजसेवी​
श्रीमती प्रियंका अध्यापिका सामाजिक विज्ञान कस्तूरी राम पब्लिक स्कूल नरेला
16.​श्री रविंद्र गोयल, सुगंध चाय
17.​श्री सुनील कंसल, चार्टर्ड अकाउंटेंट
18.​श्री नितिन गुप्ता, आयु फार्म
19 .​श्री संजीव गर्ग, एथिकल बिज़नेस ग्रुप
20.​श्री भारत भूषण बंसल, निदेशक, ए.एल. ओवरसीज़
21.​श्री अमित राणा, कादीपुर
22.​श्री अमन गुप्ता, रोटरी क्लब
23 श्री सुरेश गुप्ता उद्योगपति
24.​सुश्री अक्षिता अरोड़ा
श्री मोहन दुआ समाजसेवी
श्री कृष्ण राणा समाजसेवी
श्री राम किशन भारद्वाज समाजसेवी28. श्रीमती इंदु वर्मा, निदेशिका, सिद्धार्थ पब्लिक स्कूल
29 श्रीमति ममता
30 . श्री विनीत गर्ग समाजसेवी
31 श्री संजय कुमार HOS वी स एग्री सीनियर सेकेंडरी स्कूल खेरा गढ़ी
श्रीमती नीतू मुंजाल प्रिंसिपल श्री राम शिक्षा मंदिर जींद पुर दिल्ली
श्रीमती सुचित्रा कत्याल प्रिंसिपल र डी पब्लिक स्कूल
श्री कपिल शर्मा
⁠श्रीमति रश्मि चौकसे राय

यह आयोजन स्पष्ट करता है कि भारतीय संविधान केवल शासन की व्यवस्था नहीं, बल्कि भारत की सामूहिक साधना है—जहाँ स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व आध्यात्मिक मूल्यों के रूप में प्रतिष्ठित हैं।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.