मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में जनसेवा को मिली नई दिशा: डॉ. सतीश खोला

परिवार पहचान प्राधिकरण के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला ने फरीदाबाद में समाधान शिविर का किया निरीक्षण -  पीपीपी से जुड़ी समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश

फरीदाबाद। हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला ने आज फरीदाबाद जिले में आयोजित समाधान शिविर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने परिवार पहचान पत्र से जुड़ी जन शिकायतों की गहन समीक्षा की और उनके त्वरित निवारण पर बल दिया। शिविर में उनके साथ अतिरिक्त उपायुक्त अंजलि श्रोत्रिया भी मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। डॉ. खोला ने शिविर में आए नागरिकों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ सीधा संवाद कर जमीनी स्तर की चुनौतियों का फीड बैक लिया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
डॉ. सतीश खोला ने शिविर में पहुंचे नागरिकों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनाए बल्कि मौके पर मौजूद अधिकारियों को त्रुटियों के अविलंब समाधान हेतु कड़े निर्देश भी दिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि परिवार पहचान पत्र मुख्यमंत्री की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जो सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और सुशासन का आधार है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पीपीपी के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है, अत: इसमें किसी भी प्रकार की तकनीकी त्रुटि या देरी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आमजन की समस्याओं का समाधान एक निश्चित समय सीमा के भीतर करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
डॉ. सतीश खोला ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को पारदर्शी, जवाबदेह और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना है। समाधान शिविर इसी दिशा में एक सशक्त पहल है, जिसके माध्यम से आमजन की समस्याओं का समाधान उनके द्वार पर ही किया जा रहा है। इस सराहनीय पहल के लिए उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में प्रशासन जनसेवा के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने और पीपीपी से संबंधित सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्यरत है।

निरीक्षण के दौरान डॉ. सतीश खोला ने क्रिड के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की, जिसमें लंबित मामलों की प्रगति का गहन विश्लेषण किया गया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन शिकायतों का समाधान तुरंत संभव है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निपटाया जाए, जबकि तकनीकी जांच या सत्यापन से जुड़े मामलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए। डॉ. खोला ने विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि समन्वित प्रयासों से न केवल कार्यप्रणाली सुदृढ़ होगी, बल्कि नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से भी राहत मिलेगी।

डा. सतीश खोला ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि समाधान शिविरों में प्राप्त होने वाली शिकायतों का सुव्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाए और उनके निस्तारण की स्थिति की नियमित रूप से मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि नागरिकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए हेल्प डेस्क को अधिक सक्रिय, संवेदनशील और उत्तरदायी बनाया जाए। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और दिव्यांगजनों की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर सुनकर उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया, ताकि हर वर्ग को सहज और सम्मानजनक सेवा मिल सके। उन्होंने कहा कि नागरिकों को उनके आवेदनों की स्थिति की समय-समय पर स्पष्ट जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और जनविश्वास को और मजबूती मिले। समेकित रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रेषित की जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर राज्य स्तर पर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे तथा जहां कहीं नीतिगत सुधार की आवश्यकता होगी, वहां प्रभावी और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। समाधान शिविर में सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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