न्यायाधीश प्रियंका वर्मा ने बिना दहेज और दिखावे के प्रशांत संग लिए सात फेरे

फरीदाबाद। उत्तराखंड के प्रसिद्ध त्रियुगीनारायण मंदिर में संपन्न हुआ एक सादगीपूर्ण और दहेज मुक्त विवाह इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। इस अनूठे आयोजन ने न केवल पारंपरिक मूल्यों को पुनर्जीवित किया, बल्कि समाज को एक सुदृढ़ और सकारात्मक संदेश भी दिया। हरियाणा न्यायिक सेवा फरीदाबाद में कार्यरत न्यायाधीश प्रियंका वर्मा ने प्रशांत के साथ बिना दहेज और बिना किसी दिखावे के सात फेरे लेकर एक नया प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। यद्यपि विवाह पूरी तरह से वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार अत्यंत सादगी और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। सीमित संख्या में परिजनों और निकट सम्बन्धी लोगों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया।

प्रियंका वर्मा के पिता (राष्ट्रपति पुलिस पदक से विभूषित) राष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता डायमंड रक्तदाता एवं पर्यावरण प्रहरी, डॉ. अशोक कुमार वर्मा हरियाणा पुलिस में उप निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता सुषमा वर्मा विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में कुरुक्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रही हैं। यह परिवार लंबे समय से सादगीपूर्ण जीवनशैली और उच्च सामाजिक मूल्यों का पालन करता आ रहा है। डॉ. वर्मा वर्षों से दहेज प्रथा के कट्टर विरोधी रहे हैं। उनका मानना है कि दहेज जैसी कुरीतियां समाज की प्रगति में बाधक हैं। उन्होंने अपनी संतानों को हमेशा सादगी, ईमानदारी और आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाया है, विशेषकर बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया। वे सदैव सामजिक कुरीतियों का खंडन करते आ रहे हैं। बेटियों को दहेज नहीं अपितु शिक्षा और संस्कार देने की विचारधारा लेकर वे वर्षों से कार्य कर रहे हैं।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.