बच्चों के अधिक सोशल मीडिया उपयोग पर नज़र रखें पेरेंट्स

कैलाश शर्मामास्टर आफ़ जर्नलिज्म
स्वतंत्र पत्रकार लेखक विचारक
कैलाश शर्मा
मास्टर आफ़ जर्नलिज्म
स्वतंत्र पत्रकार लेखक विचारक

आज सोशल मीडिया का जमाना है। आगे बढ़ने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग भी जरूरी है लेकिन इसके अधिक इस्तेमाल व दुरुपयोग खासकर बच्चों द्वारा करने के काफी दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं, इसी को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया सरकार ने 14 साल तक के बच्चों के सोशल मीडिया के अधिक उपयोग पर बैन लगाने की कार्रवाई शुरू की है। भारत में भी कई घटनाएं सोशल मीडिया के दुरुपयोग के चलते दिखाई दी हैं इससे कई बच्चों को तो भविष्य खराब हुआ ही है साथ-साथ उनके परिवार को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। आज बच्चों के पास सैकड़ों टीवी स्टेशनों और लाखों इंटरनेट साइटों तक आसान पहुंच है। वे अनगिनत वीडियो गेम और ऐप खरीद या डाउनलोड कर सकते हैं। वे कई डिवाइस पर मूवी स्ट्रीम कर सकते हैं और एक उंगली के स्वाइप पर यूट्यूब या TikTok वीडियो देख सकते हैं और वे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके दोस्तों और अजनबियों के साथ ऑनलाइन सामाजिक रूप से बातचीत कर सकते हैं। बच्चे ही नहीं उनके पैरेंट्स और बुजुर्ग भी आज सोशल मीडिया के दीवाने हैं और रात दिन उसका उपयोग करते हैं। बच्चे मन के सच्चे व सबकी आंख के तारे होते हैं उनमें अच्छे और बुरे की समझ कम होती है वे जल्दी ही सोशल मीडिया के द्वारा किए जा रहे साइबर अपराध व अन्य गलत गतिविधियों में फंस जाते हैं। वे इतनी बुरी तरह फंस जाते हैं कि अगर वे उससे निकलना भी चाहें तो निकल नहीं पाते हैं। बच्चे ठीक प्रकार से एकांत में पढ़ाई कर सकें पैरेंट्स उनके लिए अलग से स्टडी रूम का प्रबंध करते हैं यहां पेरेंट्स निश्चित हो जाते हैं कि बच्चा स्टडी रूम में पढ़ाई ठीक से कर रहा है। पेरेंट्स यह जानने की कभी भी कोशिश नहीं करते हैं कि उनका बच्चा स्टडी रूम में वास्तव में ठीक प्रकार से पढ़ाई कर रहा है,होमवर्क कर रहा है या उसको एकांत में मिल रही आजादी का वह दुरुपयोग कर रहा है या सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल कर रहा है।

हम यह नहीं कहते कि सारे बच्चे स्टडी रूम का दुरुपयोग करते हैं अधिकांश बच्चे उसमें ठीक प्रकार से पढ़ाई करके अच्छे नंबरों से एग्जाम पास करते हैं और आईआईटी नीट व प्रशासनिक सेवा की चयन परीक्षा में सफल होते हैं। फिर भी हमारा यही सुझाव है कि बच्चों की दैनिक गतिविधि, व्यवहार व उनके बढ़ते दोस्तों की संख्या व दोस्तों की प्रवृत्ति पर पेरेंट्स को नजर जरूर रखनी चाहिए। बच्चों को अपने पास बैठाकर सोशल मीडिया के उपयोग व दुरुपयोग तथा गलत दोस्तों व लोगों से दूरी बनाए रखने आदि के बारे में प्यार से,अच्छी तरह से समझाना व बताना चाहिए। उदाहरण देकर यह भी बताना चाहिए कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग से कई बच्चों का जीवन बर्बाद हो गया, उनको सजा हुई और परिवार की समाज में काफी बदनामी हुई। बच्चों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सोशल मीडिया पर नज़र रखने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप खुद सोशल मीडिया के अच्छे व गलत इस्तेमाल का अनुभव करें। अपने बच्चों द्वारा इस्तेमाल किए जाने से पहले ऐप का परीक्षण करें और गेम खेलें। ऐप और गेम को एक साथ देखें और खेलें और देखें कि वे क्या देखते हैं ताकि आप उनके स्क्रीन पर क्या देखते हैं इस बारे में बात कर सकें। आप अपने बच्चों को सबसे अच्छी तरह से जानते हैं, इसलिए आप ही सबसे अच्छे जज हैं कि वे क्या संभाल सकते हैं। आप उनकी इंटरनेट इस्तेमाल की गतिविधि पर नजर रखें उनके डिवाइस को जांचे और बच्चों के इंटरनेट उपयोग में किए जाने वाले सभी ऑनलाइन डिवाइस स्मार्टफोन,टैबलेट और कंप्यूटर की जांच करें। अगर आपको लगता है कि बच्चे जिस एप्स ऐप्स और गेम का इस्तेमाल कर रहे हैं वह सही नहीं है तो उसको हटा दें या प्रतिबंधित कर दें।

हैं। माता-पिता इंटरनेट उपयोग पर समय सीमा भी निर्धारित कर सकते हैं।बच्चे की सोशल मीडिया गतिविधि पर नज़र रखने के लिए माता-पिता अपने खुद के अकाउंट बना सकते हैं और अपने बच्चे के पेज और गतिविधि को खुद ही चेक कर सकते हैं। ऐसे प्रोग्राम और ऐप उपलब्ध हैं जो बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर नज़र रख सकते हैं और माता-पिता को किसी भी अनुचित भाषा या फ़ोटो के बारे में सचेत कर सकते हैं। अगर बच्चे को यह पता चलता है कि मां-बाप उसकी सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं तो उसको समझाएं यह उसकी भलाई के लिए ही है। उसे यह भी समझाएं कि अगर वह जाने अनजाने में सोशल मीडिया के दुरुपयोग में फंस गया है तो वह निसंकोच बिना किसी डर के उसके बारे में हमें (माता पिता) बताएं,हम उसकी मदद करेंगे और उसे इस फंस चुके जंजाल से निकालेंगे। यह भी सच है कि किसी भी तरह की निगरानी बच्चों को हर चीज़ से नहीं बचा सकती और बच्चे अक्सर यह पता लगा लेते हैं कि माता-पिता के नियंत्रण से कैसे बचना है। इसलिए अपने बच्चों को एक अच्छा रोल मॉडल बनकर और ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में अपने बच्चों से बात करके एक जिम्मेदार इंटरनेट उपयोगकर्ता बनने के लिए प्रोत्साहित करना सबसे अच्छा है। यदि कोई समस्या जैसे साइबरबुलिंग या सेक्सटिंग सामने आती है तो ऐसी स्थिति में पहले बच्चे का हौसला बढाएं कि हम तुमको इससे निकालेंगे उसके बाद पुलिस और प्रशासन,अपने परिचित वकील सामाजिक सहयोगियों की मदद लें।

 

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