‘नरेंद्र’ का विकसित भारत

'Narendra's' developed India
‘Narendra’s’ developed India

मुकेश वशिष्ठ

स्वामी विवेकानंद, ऐसा युवा सन्यासी जिन्होंने 11 सितंबर 1893 अमेरिका पहुंचकर पूरी दुनिया को भारतीय दर्शन की अलौकिक ताकत का अहसास कराया। शिकागो की धर्म संसद में उन्होंने सिर्फ इतना ही तो कहा था, “अमरीकी भाइयों और बहनों”। तालियों की ऐसी गड़गड़ाहट हुई कि शोर ने थमने का नाम नहीं लिया। स्वामी विवेकानंद का इस ऐतिहासिक भाषण से भारत पूरी दुनिया में पुनर्प्रतिष्ठित हुआ। वास्तव में स्वामी विवेकानंद का यह दर्शन, विकसित भारत से विश्वगुरु ​भारत का दृढ़ संकल्प है।

स्वामी विवेकानंद भारतीय दर्शन को समझते हुए कहते हैं कि “मनुष्य का संघर्ष जितना कठिन होगा, उसकी जीत भी उतनी बड़ी होगी। जितना बड़ा आपका लक्ष्य होगा, उतना बड़ा आपका संघर्ष”। स्वामी विवेकानंद के विचार सभी के लिए प्रेरणा-स्रोत हैं, जो हमारे जीवन में आशा की एक नदी के सामान हैं। उनके द्वारा दिए गए ओजस्वी भाषण तथा प्रेरणादाई उपदेश जीवन में आगे बढ़ने एवं सफलता हासिल करने में वरदान के सामान हैं। विवेकानंद जी के विचार को पढ़ने मात्र से ही युवाओं के अंदर कुछ हासिल करने की उम्मीद पैदा हो जाती है। स्वामी विवेकानंद जी इस बात को हर युवा को आत्मसात करने की जरूरत है कि युवा वर्ग के पास ताकत होती है कि वो अपने आनेवाले कल को अच्छा बना सकें। परन्तु यह पूर्णतया उन पर निर्भर करता है कि वह कितने सकारात्मक, लगनशील एवं परिश्रमी हैं। हर युवा को इसे सीखने की जरूरत है।

उनका मानना था कि नास्तिक वह नहीं जो भगवन को नहीं मानता, बल्कि नास्तिक वह है, जो अपने आप में विश्वास नहीं रखता। वे कहते थे कि व्यक्ति को केवल उसकी आत्मा ही सिखा सकती है। व्यक्ति की आत्मा उसका सबसे अच्छा गुरू है।
स्वामी विवेकानंद कहते हैं कि व्यक्ति के अंदर सकारात्मकता का भाव होना बहुत जरूरी है, क्योंकि सकारात्मक सोच के जरिए व्यक्ति अपने जीवन में कुछ भी हासिल करने की क्षमता रखता है। स्वामी जी कहते हैं कि एक समय में एक काम करो और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ। विवेकानंद का सबसे प्रसिद्ध तथा चर्चित संदेश “उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत”, अर्थात उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक कि अपने लक्ष्य तक न पहुंच जाओ। यह मूल मंत्र कमोबेश हर युवा के दिल में एक चित्र के रूप में शोभायमान होना चाहिए।

व्यक्ति जब तक अंदर से दृढ़ इच्छाशक्ति वाला नहीं होगा तब तक संदेश मात्र से न तो स्व-निर्माण होगा और न ही राष्ट्र-निर्माण में योगदान संभव हो पाएगा। विवेकानंद राष्ट्र-निर्माण हेतु युवाओं के सामर्थ्य, उचित शिक्षा तथा चरित्र-निर्माण पर विशेष बल देते हैं। स्वामी विवेकानंद राष्ट्र-निर्माण में शिक्षा के महत्व को लेकर कहते थे कि युवाओं को सशक्त तथा सामर्थ्यवान बनाने के लिए शिक्षा एक मूल साधन है। उनका मानना था कि युवा वर्ग अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलें और जो भी वो पाना चाहते हैं उसके लिए सही देशा में प्रयास करके उसे प्राप्त करें। स्वामी जी ने युवाओं हेतु एक महत्वपूर्ण संदेश दिया “संभव की सीमा जानने का एक ही तरीका है, असंभव से भी आगे निकल जाना”। उनका मानना था कि ‘हम जो भी हैं अपनी सोच की वजह से है, इसलिए इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आप क्या सोचते हैं। शब्द गौण हैं, विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं’

भारत युवाओं का राष्ट्र है। इसलिए भारत का भविष्य युवा वर्ग के ऊपर निर्भर है। स्वामी विवेकानंद की भांति देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी युवाओं पर लगातार उत्साहित करने में जूटे है। वे अक्सर कहते है कि आज के युवाओं को विवेकानंद की सोच को आत्मीकरण करने की आवश्यकता है। स्वामी जी के विचार और कर्म युवाओं के लिए प्रेरणा-स्रोत हैं जो उन्हें ऊर्जा प्रदान करते हैं। समस्त युवा वर्ग के लिए स्वामी जी के विचार सदैव एक गुरु की तरह मार्गदर्शक भाव में स्थापित रहेंगे, उनके व्यक्तित्व-निर्माण में सहायक होंगे और उन्हें महान कार्य करने हेतु प्रेरित/ उत्साहित करते रहेंगे। अस्पृश्यता निवारण,अशिक्षा को दूर करना, उद्योगों का विकास एवं महिला उत्थान जैसे अनेक विषयों पर उन्होंने भारत के विकास की नई दृष्टि दी। जो आज भी हमारे लिए प्रेरक मार्गदर्शन है। भोग-विलासिता एवं सांप्रदायिकता के संघर्ष में फंसे वैश्विक समुदाय को भी उन्होंने विश्व शांति का मार्ग दिखाया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जीवन पर स्वामी विवेकानंद के विचारों की गहरी अमिट छाप दिखाई देती है। बीते दस वर्षों का आंकलन करने पर ध्यान आता है कि प्रधानमंत्री मोदी के लिए गरीब कल्याण एवं स्वाभिमानी समृद्ध भारत एक मिशन है। जिसे वे युवाओं से पूरा कराना चाहते हैं। 15 अगस्त 2023 को प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा दिए गए अपने भाषण में भारत को विकसित भारत बनाने का अटूट संकल्प है।

इसलिए उन्होंने प्रत्येक भारतीय को पंचप्रण का पालन करने का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छता अभियान, उज्जवला योजना, प्रत्येक गांव में बिजली, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन आदि अनेक योजनाएं गरीब उत्थान के लिए मील का पत्थर साबित हुई है। साढे चार करोड़ से अधिक परिवार को आवास देना,1 करोड़ 67 लाख युवाओं को कौशल विकास विभाग रोजगार उपलब्धि का माध्यम बना। 80 करोड़ लोगों को प्रतिमाह अन्नपहुँचाना, गरीब की रोटी की समस्या का समाधान है। गरीब की रोटी के विषय पर स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि गरीब को पहले रोटी दो तब गीता सुनाओ क्योंकि उसकी आवश्यकता रोटी है। समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हमारे छोटे-छोटे शिल्पकार जिसको प्रधानमंत्री जी ने भारत का निर्माण करने वाले विश्वकर्मा कहा।

स्वामी विवेकानंद जी का यह आह्वान ‘उठो जागो और अपने लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना जीवन का आदर्श मान लिए है। वे बिना रुके, बिना थके विकसित भारत के लक्ष्य प्राप्ति में लगे हैं। अगर हमारी पीढ़ियां भी स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को आत्मसात करके आगे बढ़ेगी, तो निश्चित देश से ‘नरेंद्र’ जैसे युवाओं की ऐसी फौज खड़ी होगी, जिसपर पूरी दुनिया नाज़ करेगी। तब भारत को विकसित समृद्धशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित होने से कोई नहीं रोक पाएगा। स्वामी विवेकानंद जी के जन्म दिवस पर यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

लेखक: मुख्यमंत्री हरियाणा के मीडिया समन्यवक हैं

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