हरियाणा की बिजली हड़ताल को मिला राष्ट्रव्यापी समर्थन, 11 अगस्त को देशभर में होंगे प्रदर्शन : सुभाष लांबा
हड़ताल के दौरान हरियाणा की बिजली आपूर्ति के लिए दूसरे राज्यों से कर्मचारी नहीं भेजे जाएंगे
फरीदाबाद। हरियाणा में बिजली क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में 11 से 13 अगस्त तक प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल को देशभर के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों का व्यापक समर्थन मिल गया है। यह जानकारी देते हुए नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज एंड इंजीनियर्स (एनसीसीओईईई) के वरिष्ठ सदस्य एवं इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईईएफआई) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि (एनसीसीओईईई) के बेनर तले 11 अगस्त को देशभर में हरियाणा के कर्मचारियों के समर्थन में प्रदर्शन किए जाएंगे। साथ ही सभी राज्यों की यूनियनों को निर्देश दिए गए हैं कि हड़ताल के दौरान हरियाणा में बिजली आपूर्ति के लिए कोई कर्मचारी नहीं भेजा जाएगा।
उन्होंने बताया कि एनसीसीओईईई की गत दिवस आयोजित आनलाइन बैठक में हरियाणा सरकार द्वारा पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस, एग्री डिस्कॉम और स्मार्ट मीटरिंग लागू करने के निर्णयों को बिजली क्षेत्र के ‘बैकडोर निजीकरण’ का हिस्सा बताते हुए कड़ी निंदा की गई। साथ ही एचकेआरएन कर्मचारियों को हड़ताल में भाग लेने पर सेवा समाप्ति की चेतावनी देने वाले पत्र को कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए तुरंत वापस लेने की मांग की गई।
ईईएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि हरियाणा का आंदोलन अब राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुका है। एनसीसीओईईई हरियाणा के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विवादित निर्णयों पर रोक लगाने और कर्मचारियों से तत्काल वार्ता कर हड़ताल टालने की पहल करने की मांग करेगी। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में भी समानांतर वितरण लाइसेंस का प्रस्ताव व्यापक विरोध के बाद वापस लेना पड़ा था, लेकिन हरियाणा में किसानों, कर्मचारियों, उपभोक्ताओं और विभिन्न संगठनों के विरोध के बावजूद गुरुग्राम और नूंह में इसे लागू करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एग्री डिस्कॉम और स्मार्ट मीटरिंग भी इसी निजीकरण नीति का हिस्सा हैं। यदि सरकार ने इन निर्णयों पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को देशभर में और तेज़ किया जाएगा।
