बीके अस्पताल में 50 लाख के डीजल घोटाले की जांच के नाम पर रौब झाड़ने वाला ‘फर्जी विजिलेंस अधिकारी’ गिरफ्तार
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी के सिविल अस्पताल में एनएचएम एम्बुलेंस के करीब 50 लाख रुपये के डीजल घोटाले की जांच का फायदा उठाकर अस्पताल प्रशासन पर दबाव बनाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। खुद को राष्ट्रपति भवन से नियुक्त विजिलेंस अधिकारी बताकर सीएमओ को धमकाने वाले एक शातिर आरोपी को पुलिस चौकी नंबर-03 की टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया है।
पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के भटोना गांव निवासी 57 वर्षीय राजेंद्र सिंह गत 4 नवंबर को शाम के समय बीके अस्पताल के एनएचएम ऑफिस में पहुंचा था। आरोपी ने खुद को विजिलेंस अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उसे राष्ट्रपति भवन में कार्यरत ‘डॉ. विजेंद्र सिंह, फील्ड मार्शल’ द्वारा नियुक्त किया गया है। उसने रौब झाड़ते हुए कहा कि वह फरीदाबाद में एम्बुलेंस के तेल में हुए गबन की जांच करने और रिकॉर्ड खंगालने आया है। इस दौरान उसने सीएमओ डॉ. जयंत आहूजा को धमकाते हुए कहा कि वह उनकी नौकरी खा जाएगा और कर्मचारियों को सस्पेंड करवा देगा।
आरोपी के बातचीत करने के तरीके और उसके बयानों से सीएमओ डॉ. जयंत आहूजा को उसकी पहचान पर संदेह हुआ। उन्हें अहसास हुआ कि आरोपी फर्जी अधिकारी बनकर दबाव बनाने और अवैध वसूली या ठगी की फिराक में है। बिना देर किए सीएमओ ने तुरंत डायल-112 पर कॉल कर पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी राजेंद्र सिंह को हिरासत में ले लिया और उसे एनआईटी नंबर-3 चौकी ले आई। मामले में थाना एसजीएम नगर में विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
गौरतलब है कि बीके अस्पताल में पहले से ही करीब 50 लाख रुपये के डीजल घोटाले की उच्चस्तरीय जांच चल रही है। यह जांच मुख्यालय की टीम कर रही है। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी इसी चल रही जांच के नाम पर अधिकारियों को डरा-धमकाकर अनुचित लाभ उठाना चाहता था। हालांकि, पुलिस जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि अस्पताल के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी ने आरोपी को कोई पैसा नहीं दिया था। पुलिस चौकी नंबर-03 इंचार्ज मनोज के नेतृत्व में आरोपी से गहन पूछताछ के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
