विशेषज्ञों ने डॉक्टरों को स्ट्रोक के आधुनिक इलाज की तकनीक का दिया प्रशिक्षण

फरीदाबाद। शहर के एकॉर्ड अस्पताल में बुधवार को न्यूरोलॉजी से जुड़े डॉक्टरों को स्ट्रोक के आधुनिक उपचार के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ‘एकॉर्ड स्ट्रोक इंटरवेंशन वर्कशॉप’ का आयोजन किया गया। यह हैंड्स-ऑन कार्यशाला अस्पताल की अत्याधुनिक न्यूरो कैथ लैब में आयोजित हुई, जिसमें शहर के न्यूरो विशेषज्ञों, चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ ने भाग लिया। कार्यशाला में अस्पताल के चेयरमैन डॉ. जितेंद्र कुमार ने कहा कि जीवनशैली में बदलाव और बढ़ती उम्र के साथ नसों से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। स्ट्रोक भी ऐसी ही गंभीर बीमारी है, जिसमें मस्तिष्क में रक्तस्राव या रक्त प्रवाह रुकने से मरीज को लकवा तक हो सकता है। उन्होंने बताया कि एकॉर्ड अस्पताल को स्ट्रोक के विश्वस्तरीय इलाज के लिए नौ बार प्लेटिनम अवार्ड मिल चुका है, जो एकॉर्ड में स्ट्रोक के विश्व स्तरीय इलाज को दर्शाता है।  कार्यशाला की अध्यक्षता न्यूरोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. रोहित गुप्ता ने की।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य तीव्र स्ट्रोक के उपचार में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक तकनीक ‘मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी’ के बारे में डॉक्टरों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देना था। विशेषज्ञों ने बताया कि स्ट्रोक के मामलों में समय सबसे अहम होता है और यह तकनीक समय पर अपनाई जाए तो मरीज की जान बचाने के साथ स्थायी विकलांगता के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को न्यूरो कैथ लैब का भ्रमण कराया गया और लाइव डेमोंस्ट्रेशन के जरिए मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी की पूरी प्रक्रिया समझाई गई। कार्यक्रम समन्वयक न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. संदीप घोष ने फ्लो मॉडल्स के माध्यम से डॉक्टरों को तकनीक का प्रायोगिक अनुभव दिया, जिससे जटिल परिस्थितियों में उपचार की समझ मजबूत हो सके।

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मेघा शारदा ने कहा कि स्ट्रोक तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। समय पर पहचान, जागरूकता और आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी से मरीजों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम चिकित्सा समुदाय को नई तकनीकों से अपडेट रखते हैं और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यशाला के दौरान चिकित्सकों ने विशेषज्ञ डॉ. रोहित गुप्ता, डॉ. संदीप घोष, डॉ. मेघा शारदा से स्ट्रोक के इलाज से जुड़े कई तकनीकी सवाल पूछे। मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी की प्रक्रिया, समय सीमा, जोखिम और मरीज चयन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने व्यावहारिक उदाहरणों के साथ शंकाएं दूर करते हुए बताया कि सही समय पर निर्णय ही उपचार की सफलता की कुंजी है।

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