हाईकोर्ट पहुंची अल-फलाह यूनिवर्सिटी, 5 मई को होगी अगली सुनवाई

फरीदाबाद। अल-फलाह यूनिवर्सिटी और अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा निजी विश्वविद्यालय को प्रशासक के अधीन रखने के फैसले को चुनौती देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में सरकार के इस कदम को विश्वविद्यालय की स्वायत्तता खत्म करने वाला और मनमाना बताया गया है। हाई कोर्ट ने याचिका सुनवाई के लिए मंजूर कर ली है, अगली सुनवाई पांच मई को निर्धारित की गई है। याचिका में 18 मार्च को आईएएस अधिकारी को प्रशासक नियुक्त करने के आदेश के साथ ही हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज संशोधन कानून को भी चुनौती दी गई है। विश्वविद्यालय का कहना है कि संशोधित प्रविधानों के जरिए सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा या कानून व्यवस्था के नाम पर निजी विश्वविद्यालय का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में लेने का अधिकार दे दिया गया है।

इससे प्रबंधन, वित्त और संपत्ति बाहरी नियंत्रण में चली जाती है और नियंत्रण की समय सीमा भी स्पष्ट नहीं है। याचिका में इन प्रविधानों को असंवैधानिक बताते हुए कहा गया कि यह अल्पसंख्यक संस्थानों को स्वयं संचालन के अधिकार का उल्लंघन करते हैं। ट्रस्ट की ओर से हाई कोर्ट को बताया कि जिस घटना के बाद कार्रवाई हुई, उसमें कथित रूप से शामिल चार फैकल्टी सदस्यों को तत्काल सेवा से हटाया जा चुका है। याचिका में कहा गया कि यह घटना अप्रत्याशित थी और संस्थान ने जिम्मेदारी के साथ तुरंत कदम उठाए। हाई कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है।

अदालत ने केंद्र गृह मंत्रालय को भी पक्षकार बनाने की अनुमति दी है। गांव धौज स्थित अलफलाह यूनिवर्सिटी में पिछले साल सफेदपोश आतंक का पर्दाफाश हुआ था। यहां पढ़ाने वाले डाक्टर मुजम्मिल, डॉक्टर उमर व डॉक्टर शाईन थे आतंकी गतिविधियों में संलिप्त पाए गए थे। इनमें दिल्ली लाल किले के पास हुए डॉक्टर उमर ने फिदायीन ब्लास्ट किया था। इसके बाद सरकार ने यूनिवर्सिटी के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए जांच और कार्रवाई शुरू की। राज्य सरकार ने जांच के बाद विश्वविद्यालय में अनियमितताओं का हवाला देते हुए प्रशासनिक नियंत्रण संभाला था। सरकार का कहना है कि लगभग 1700 सौ छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और प्रशासनिक व वित्तीय कार्य प्रशासक और नियुक्त टीम संभालेगी।

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