जीवा पब्लिक स्कूल में ‘कल्पनाओं की उड़ान’ का भव्य एवं सफल आयोजन

फरीदाबाद । सेक्टर-21बी स्थित जीवा पब्लिक स्कूल में आज एक अद्वितीय एवं मनोरम कार्यक्रम ‘कल्पनाओं की उड़ान’ का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें फरीदाबाद के अनेक प्ले स्कूलों के नन्हे-मुन्ने बच्चों एवं उनके अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं मनोरंजक गतिविधियों का संगम देखने को मिला।

जीवा पब्लिक स्कूल में आयोजित यह ‘कल्पनाओं की उड़ान’ कार्यक्रम बच्चों के लिए एक विशेष अवसर बन गया, क्योंकि यह आयोजन चिल्ड्रन डे की उमंग और उत्साह से भी जुड़ा रहा। बच्चों की मुस्कान, उनका आत्मविश्वास और उनकी ऊर्जा ने कार्यक्रम को चिल्ड्रन डे की सच्ची भावना से भर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष ऋषिपाल चौहान, उपाध्यक्षा चंद्रलता चौहान, एकेडमिक हेड मुक्ता सचदेव, विभिन्न प्ले स्कूलों के प्रिंसिपल्स की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस कार्यशाला में भाग लेने वाले प्ले स्कूलों के नाम इस प्रकार से है – नटराज प्ले स्कूल, जी• एम• बी प्ले स्कूल, स्वीट एंजेल प्ले स्कूल, स्प्रिंग फील्ड एलेमेंट्री प्ले स्कूल, खुशी प्ले स्कूल एवं लिटिल हैंडस प्ले स्कूल।

‘कल्पनाओं की उड़ान’ का मुख्य उद्देश्य बच्चों की प्रतिभा, रचनात्मकता और कौशल को एक खुले मंच पर प्रस्तुत करना था, ताकि उनके आत्मविश्वास, व्यक्तित्व एवं सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहन मिल सके। जीवा पब्लिक स्कूल हमेशा से बच्चों के समग्र विकास के लिए नवीनतम व प्रेरणादायक गतिविधियों का आयोजन करता रहा है, जिसकी झलक इस कार्यक्रम में भी देखने को मिली।

कल्पनाओं की उड़ान कार्यक्रम में बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही रंग-बिरंगी टॉय ट्रेन, जिसमें बैठकर नन्हे-मुन्ने बच्चों ने हर्ष और रोमांच का अनुभव किया। इसके साथ ही कार्यक्रम में प्रदर्शित की गई विभिन्न साइंटिफिक गतिविधियों और मॉडलों ने बच्चों की जिज्ञासा को और प्रबल किया, जिससे सीख और मनोरंजन का अद्भुत संगम देखने को मिला।” इसके अलावा कई प्रकार के अन्य गतिविधियों को भी बच्चों के लिए शामिल किया गया।

विद्यालय के स्ट्रैटेजिक प्रोजेक्ट हेड  जयवीर सिंह ने भी अपने विचारों को व्यक्त किया उन्होंने अभिभावकों को सकारात्मक एवं प्रभावी पेरेंटिंग के महत्वपूर्ण सिद्धांत बताए। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों को सही मार्गदर्शन देना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
उन्होंने बच्चों की डिजिटल लत, अभिभावकीय व्यवहार के प्रभाव और परिवारिक समय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं। अतः अभिभावकों को स्वयं बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बनना चाहिए।”

विद्यालयाध्यक्ष ऋषिपाल चौहान ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चे की प्रकृति, गति और रुचियों को समझें, क्योंकि यही समझ उनके बेहतर भविष्य की नींव बनती है।
उन्होंने जीवा स्कूल के सिद्धांतों, जीवा लर्निंग सिस्टम, तथा एन•ई•पी• आधारित शिक्षा-पद्धति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जीवा में शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के चरित्र, संवेदनशीलता और व्यवहारिक कौशलों के विकास पर भी केंद्रित है।

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