विश्व पर्यावरण दिवस पर एकॉर्ड अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम

फरीदाबाद। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एकॉर्ड सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में गुरुवार को विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने की शपथ ली। साथ ही लोगों को स्वच्छता, हरित जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए अस्पताल परिसर में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए पार्किंग सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। कार्यक्रम में पर्यावरण और स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंधों पर भी चर्चा की गई।

वक्ताओं ने कहा कि बढ़ता प्रदूषण कई गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है, इसलिए पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाना समय की आवश्यकता है। अस्पताल के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) डॉ. जितेंद्र कुमार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन तक सीमित रहने वाला अभियान नहीं है, बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा। स्वास्थ्य संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे समाज को स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण के प्रति जागरूक करें। सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. प्रबल रॉय ने कहा कि प्रदूषण का असर शरीर के विभिन्न अंगों पर पड़ता है और कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए पर्यावरण को स्वच्छ रखना बेहद जरूरी है। कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. ऋषि गुप्ता ने कहा कि वायु प्रदूषण हृदय रोगों के बढ़ते मामलों का एक प्रमुख कारण बन रहा है। लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की दिशा में प्रयास करने चाहिए। ऑर्थोपेडिक्स विभाग के निदेशक डॉ. युवराज कुमार ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छ वातावरण आवश्यक है।

पर्यावरण संरक्षण के प्रयास आने वाली पीढिय़ों को बेहतर और सुरक्षित भविष्य प्रदान करेंगे। न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. रोहित गुप्ता ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण का असर केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक एवं न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। पर्यावरण के प्रति जागरूकता आज की सबसे बड़ी जरूरत है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. आरसी. सोनी ने कहा कि अस्पताल मरीजों के उपचार के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को भी प्राथमिकता देता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक भागीदारी और जनजागरूकता से ही सकारात्मक बदलाव संभव है। कार्यक्रम के अंत में सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया तथा लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने, प्लास्टिक का उपयोग कम करने और पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने में योगदान देने की अपील की।

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