प्रेस नोट – “भारतीय शास्त्रीय संगीत, संस्कृति और साधना का अनुपम उत्सव” सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र में संगीत बैठक के रूप में आयोजित किया गया –
सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र दिल्ली “रमेश नगर” द्वारा आयोजित “संगीत बैठक” का भव्य एवं गरिमामय आयोजन सनातन धर्म मंदिर, पश्चिम दिल्ली में संपन्न हुआ। यह आयोजन भारतीय शास्त्रीय संगीत की गौरवशाली परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों तथा युवा प्रतिभाओं के प्रोत्साहन का एक उत्कृष्ट उदाहरण रहा। कार्यक्रम में संगीत प्रेमियों, अभिभावकों, विद्यार्थियों एवं गणमान्य अतिथियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने पूरे वातावरण को सुर, ताल और संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण प्रस्तुति विश्वविख्यात सरोद वादक श्री अर्नब भट्टाचार्य जी की रही। उनके सरोद से निकले मधुर स्वरों ने श्रोताओं को भारतीय राग-संगीत की गहराइयों से परिचित कराया और सभी को भाव-विभोर कर दिया। उनके साथ तबले पर श्री निलीमेश चक्रवर्ती जी ने अपनी विलक्षण लयकारी एवं संवेदनशील संगत से प्रस्तुति को चार चाँद लगा दिए। दोनों कलाकारों के सुर और ताल के अद्भुत सामंजस्य ने ऐसा संगीतमय वातावरण निर्मित किया, जिसने उपस्थित जनसमूह को आत्मिक आनंद की अनुभूति कराई। संगीत प्रेमियों ने उनकी प्रस्तुति का भरपूर रसास्वादन किया और तालियों की गड़गड़ाहट से उनका अभिनंदन किया।
इस अवसर पर सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र के विद्यार्थियों ने भी अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत शास्त्रीय एवं सुगम संगीत, कथक नृत्य तथा वेस्टर्न डांस की आकर्षक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। बच्चों के आत्मविश्वास, मंच संचालन कौशल, अनुशासन तथा कला के प्रति समर्पण ने सभी उपस्थितजनों को अत्यंत प्रभावित किया। उनकी प्रस्तुतियाँ इस बात का प्रमाण थीं कि उचित मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और सकारात्मक वातावरण मिलने पर युवा पीढ़ी कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त कर सकती है।
कार्यक्रम के दौरान केंद्र द्वारा आयोजित समर कैंप में सहभागिता करने वाले बच्चों को “पार्टिसिपेशन सर्टिफिकेट” प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके उत्साह, रचनात्मकता, सीखने की लगन एवं सक्रिय सहभागिता का प्रतीक था। बच्चों के चेहरे पर दिखाई देने वाली प्रसन्नता और उपलब्धि का भाव कार्यक्रम की विशेष उपलब्धियों में से एक रहा।
कार्यक्रम के समापन पर सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र के प्रधानाचार्य श्री दीपेन्द्र कांत जी ने संगीत बैठक का महत्व के विषय में बताया कि
संगीत बैठक का मूल उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं सांस्कृतिक कलाओं के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता और रुचि उत्पन्न करना, कला साधना के महत्व को स्थापित करना तथा कलाकारों एवं विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक सशक्त एवं सार्थक मंच प्रदान करना है। ऐसे आयोजन न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हैं, बल्कि युवाओं को भारतीय परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य भी करते हैं।
सभी कलाकारों, अभिभावकों, अतिथियों एवं संगीत प्रेमियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। अपने प्रेरणादायी संबोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि शास्त्रीय संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि एक साधना है, जिसमें उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए निरंतर अभ्यास, धैर्य, अनुशासन और समर्पण अनिवार्य हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता; नियमित रियाज़, सकारात्मक सोच और अटूट लगन ही उन्हें अपने लक्ष्य तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त करती है।
उन्होंने यह भी बताया कि सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा संचालित देशभर के 22 संगीत कला केंद्र, जो प्रयाग संगीत समिति से मान्यता प्राप्त हैं, भारतीय संगीत एवं सांस्कृतिक कलाओं के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इन केंद्रों में अनुभवी एवं गुणी शिक्षकों के मार्गदर्शन में प्रतिवर्ष हजारों विद्यार्थी संगीत की परीक्षाएँ उत्तीर्ण कर प्रभाकर जैसी प्रतिष्ठित उपाधियाँ प्राप्त करते हैं तथा विभिन्न क्षेत्रों में सफलता अर्जित कर समाज एवं राष्ट्र की सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं। अनेक विद्यार्थी संगीत अध्यापक, कलाकार तथा विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्यरत होकर अपने सपनों को साकार कर रहे हैं।
यह “संगीत बैठक” केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संगीत परंपरा, संस्कृति, कला साधना और युवा प्रतिभाओं के सम्मान का एक प्रेरणादायी उत्सव था, जिसने सभी उपस्थितजनों के हृदय में संगीत और संस्कृति के प्रति नई ऊर्जा, उत्साह और श्रद्धा का संचार किया।
सुर, साधना और संस्कृति के इस अद्भुत संगम को सफल बनाने वाले सभी कलाकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों, आयोजकों एवं सहयोगियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
