नूह : न्यू होरिजन स्कूल बाई के प्रिंसिपल मास्टर मुस्तफा सलम्बा ने कहा कि रमज़ान इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र और बरकतों भरा महीना है। यह महीना इबादत, दुआ, सब्र और आत्मशुद्धि का संदेश देता है। पूरे विश्व में मुसलमान इस महीने में रोज़ा रखकर अल्लाह की रज़ा हासिल करने की कोशिश करते हैं। रमज़ान हमें यह सिखाता है कि सच्ची इबादत केवल नमाज़ और रोज़े तक सीमित नहीं, बल्कि अच्छे आचरण, सच्चाई और इंसानियत की सेवा में भी है।
रोज़ा इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक भूखे-प्यासे रहकर इंसान अपने अंदर धैर्य और आत्मसंयम विकसित करता है। इससे गरीबों और जरूरतमंदों के दर्द का एहसास होता है और समाज में करुणा तथा भाईचारे की भावना मजबूत होती है। रमज़ान के दौरान कुरआन की तिलावत, तरावीह की नमाज़ और दुआओं का विशेष महत्व होता है।
रमज़ान की आखिरी दस रातें बेहद खास मानी जाती हैं। इन्हीं में शब-ए-क़द्र की रात आती है, जिसे हजार महीनों से बेहतर बताया गया है। इस रात की इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। यह महीना हमें ज़कात और फ़ित्रा के माध्यम से जरूरतमंदों की मदद करने की प्रेरणा देता है, ताकि समाज में समानता और आपसी प्रेम बढ़े। रमज़ान के समाप्त होने पर ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है, जो खुशी और भाईचारे का प्रतीक है।
मास्टर मुस्तफा ने कहा कि रमज़ान आत्ममंथन और नेक राह पर चलने का महीना है। हमें इस पवित्र महीने की सीख को अपने जीवन में अपनाकर समाज में शांति, सद्भाव और इंसानियत को मजबूत करना चाहिए।
