एनआईटी के विधायक की फर्जी मुहर से 100 फाइलें हुई वेरिफाई

पत्नी का आधार बनवाते वक्त आया आरोपी को आइडिया

फरीदाबाद। एनआईटी के भाजपा विधायक सतीश फागना के नाम की फर्जी स्टैंप, लेटरहेड और डिजिटल हस्ताक्षर से आरोपी सौरभ लोगों से कागजात वेरीफाई करवाने की एवज में 800 से 1000 रुपए वसूलता था। आरोपी सीएससी चलाता था और पत्नी का आधार कार्ड बनवाते वक्त उसे यह आइडिया आया। पुलिस ने आरोपी के पास से फर्जी मुहर और लेटरहेड भी बरामद किए है। यह खुलासा पूछताछ के दौरान आरोपी ने किया है। फिलहाल वह तीन दिन के पुलिस रिमांड पर है। पुलिस के अनुसार अब तक वह 100 से अधिक लोगों के दस्तावेजों पर फर्जी सत्यापन कर चुका था। जिन लोगों ने पैसे देने में आनाकानी की, उन्हें खुद दस्तावेज सत्यापित कराने के लिए कह देता था। लोगों को कार्यालयों की भागदौड़ से बचाने के नाम पर वह रकम वसूलता था।

फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब सौरभ से दस्तावेज तैयार करवाने वाले कुछ लोग उन्हें लेकर विधायक के डबुआ कॉलोनी स्थित कार्यालय पहुंचे। दस्तावेज देखते समय कार्यालय प्रभारी सत्यप्रकाश को मुहर पर शक हुआ। विधायक से पुष्टि की गई तो पता चला कि इन दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर ही नहीं थे। इसके बाद विधायक कार्यालय में तैनात प्रकाश पटेल की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। एनआईटी विधायक सतीश फागना के मुताबिक उनको इस फर्जीवाड़े की कोई जानकारी नहीं थी। जब उनके कर्मचारियों ने कागजों पर लगी मुहर के बारे में बताया तो पता चला कि उन्होंने ये कागज साइन ही नही किए है। उन्होंने पुलिस से ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है। पुलिस के अनुसार आरोपी सौरभ करीब पांच साल से पर्वतीय कॉलोनी में सीएससी केंद्र चला रहा था। इसी साल किसी कारण से केंद्र बंद हो गया।

इसके बाद उसने आसपास के लोगों के आधार कार्ड बनवाने और उनमें संशोधन कराने का काम शुरू किया। आधार अपडेट के लिए कई दस्तावेजों के सत्यापन की जरूरत पड़ती थी। यहीं से उसने फर्जीवाड़े का रास्ता निकाला। पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने बताया कि पुलिस अब आरोपी से फर्जी लेटरहेड, मुहर और हस्ताक्षर तैयार कराने में इस्तेमाल सामान के अलावा कंप्यूटर और अन्य उपकरण बरामद करने की कोशिश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि सौरभ ने अकेले यह नेटवर्क खड़ा किया था या उसके साथ कोई और भी शामिल था। इसलिए आरोपी सौरभ को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। गौरतलब है कि फरीदाबाद में विधायक के नाम और लेटरहेड के इस्तेमाल से आधार फर्जीवाड़े का यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2019 में तिगांव के तत्कालीन विधायक ललित नागर के नाम के फर्जी लेटरहेड और मुहर का इस्तेमाल कर दूसरे राज्यों से आए लोगों के आधार कार्ड बनवाने वाले गिरोह का खुलासा हुआ था। उस मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया था।

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