ओपीएस, रेगुलराइजेशन, टीईटी को लेकर कर्मचारी 12 दिसम्बर को दिल्ली में करेंगे राष्ट्रीय रैली : सुभाष लांबा
रैली की तैयारियों को लेकर अक्टूबर-नवंबर में देशभर में चलेगा व्यापक जनसंपर्क एवं जागरूकता अभियान
फरीदाबाद। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकारों की लगातार उपेक्षा से नाराज़ लाखों राज्य कर्मचारी अब निर्णायक संघर्ष की ओर बढ़ेंगे। कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर 12 दिसम्बर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में राष्ट्रीय कर्मचारी रैली आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह रैली पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली, पीएफआरडीए एक्ट तथा एनपीएस/यूपीएस को समाप्त करने, सभी प्रकार के ठेका, संविदा, आउटसोर्सिंग एवं दैनिक वेतन कर्मचारियों को नियमित करने, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को शीघ्र कर्मचारी हितैषी सिफारिशें देने,
सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण पर रोक लगाने और खाली पदों को नियमित भर्ती से भरने की मांग को लेकर आयोजित की जा रही है। लांबा ने कहा कि महासंघ द्वारा 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को भेजे गए ज्ञापन को आधार बनाकर कर्मचारियों की वेतन संबंधी मांगों पर तत्काल निर्णय लिया जाना चाहिए। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में बेसिक पे का 20 प्रतिशत तथा न्यूनतम 5,000 रुपये अंतरिम राहत, 3.8 फिटमेंट फैक्टर, इन्क्रीमेंट की दर 5 प्रतिशत करने, दस वर्ष के बजाय प्रत्येक पांच वर्ष में वेतन पुनरीक्षण, ग्रुप-डी कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 40,000 रुपये तथा आबादी के आधार पर 30 से 40 प्रतिशत एचआरए शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ओपीएस की बहाली और ठेका-संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांगों में हैं।
इसके बावजूद केंद्र एवं राज्य सरकारें इन मुद्दों को लगातार टाल रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं, जिन्हें स्थायी भर्ती के माध्यम से भरकर बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिया जाना चाहिए। सुभाष लांबा ने कहा कि टीईटी की अनिवार्यता से लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के सामने नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने शिक्षकों के हित में टीईटी संबंधी अनिवार्यता को वापस लेने की मांग की। उन्होंने सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा और अन्य जन सेवाओं को मजबूत करने के बजाय उनका दायरा सीमित करना जनहित में नहीं है। उन्होंने शिक्षकों से लगातार गैर शैक्षणिक कार्य में लगाए रखने की भी कडी़ निंदा की। उन्होंने 18 प्रतिशत बकाया डीए / डीआर जारी करने, चारों लेबर कोड वापस लेने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) वापस लेने तथा संविधान के अनुच्छेद 311(2)(ए), (बी), (सी) और एस्मा को वापस लेने की भी मांग की।
महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि सितंबर में सभी राज्यों में राज्य कमेटियों की बैठकें आयोजित कर रैली की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। अक्टूबर में जिला स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद सभी विभागों में गेट मीटिंग, कर्मचारी संपर्क अभियान और जनजागरण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 15 अक्टूबर तक सभी कार्यालयों एवं स्कूलों में पोस्टर, बैनर और होर्डिंग लगाए जाएंगे तथा स्थानीय भाषाओं में प्रचार सामग्री वितरित की जाएगी। नवंबर में अभियान को और तेज करते हुए कर्मचारियों को दिल्ली रैली में बड़ी संख्या में भागीदारी के लिए लामबंद किया जाएगा। लांबा ने कहा कि 12 दिसम्बर की राष्ट्रीय रैली कर्मचारियों की लंबित मांगों को केंद्र एवं राज्य सरकारों तक मजबूती से पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच होगी। उन्होंने देशभर के राज्य सरकारी कर्मचारी संगठनों से रैली की व्यापक तैयारियों में जुटने और कर्मचारियों को संगठित करने का आह्वान किया।
