दो निर्दलीय पार्षदों ने दी गिरफ्तारी, औपचारिकता पूरी होने के बाद रिहाई
फरीदाबाद। बल्लभगढ़ में बुधवार को उस समय बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई, जब वार्ड-40 के निर्दलीय पार्षद पवन यादव और वार्ड-42 के निर्दलीय पार्षद दीपक यादव अपने समर्थकों के साथ डीसीपी कार्यालय पहुंचे। दोनों पार्षदों पर नगर निगम बल्लभगढ़ जोन के एक्सईएन डालचंद शर्मा की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके बाद उन्होंने पुलिस के समक्ष कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी गिरफ्तारी दर्ज कराई।
जानकारी के अनुसार, पूरा विवाद 28 जुलाई को शुरू हुआ था। उस दिन दोनों पार्षद अपने-अपने वार्डों में विकास कार्य नहीं होने की शिकायत लेकर नगर निगम बल्लभगढ़ जोन कार्यालय पहुंचे थे। इस दौरान उनकी एक्सईएन डालचंद शर्मा से तीखी बहस हो गई। मामला इतना बढ़ गया कि अगले दिन नगर निगम फरीदाबाद मुख्यालय पर सफाई कर्मचारी यूनियन और एक्सईएन डालचंद शर्मा धरने पर बैठ गए।
उन्होंने दोनों पार्षदों पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की। इसके बाद बस अड्डा पुलिस चौकी में शिकायत दी गई, जिसके आधार पर पुलिस ने दोनों पार्षदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। एफआईआर दर्ज होने के बाद बुधवार को दोनों पार्षद अपने समर्थकों के साथ डीसीपी कार्यालय पहुंचे। वहां करीब डेढ़ घंटे तक कानूनी प्रक्रिया चली, जिसके बाद दोनों की गिरफ्तारी दर्ज कर उन्हें आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जाने की अनुमति दे दी गई।
इस दौरान तेज बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में महिला और पुरुष समर्थक डीसीपी कार्यालय के बाहर डटे रहे। समर्थकों की भारी भीड़ को देखते हुए डीसीपी कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने मुख्य गेट पर ताला लगा दिया और समर्थकों को कार्यालय के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। पूरे क्षेत्र में पुलिस की निगरानी बनी रही ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब दीपक यादव और पवन यादव डीसीपी कार्यालय से बाहर आए तो समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया।
समर्थकों ने दोनों पार्षदों को अपने कंधों पर उठा लिया और नारेबाजी करते हुए जुलूस की शक्ल में उन्हें बल्लभगढ़ की मजार तक लेकर गए। पूरे रास्ते समर्थकों ने दोनों के समर्थन में नारे लगाए और बड़ी संख्या में लोग इस जुलूस में शामिल रहे। मीडिया से बातचीत में दोनों पार्षदों ने कहा कि जो अधिकारी जनता के विकास कार्य नहीं करना चाहते, वे जनप्रतिनिधियों पर झूठे मुकदमे दर्ज करवाने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जनता के हितों की लड़ाई जारी रहेगी और यदि लोगों के काम नहीं किए गए तो ऐसे अधिकारियों के कार्यालयों पर इसी तरह विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जनता की आवाज उठाने के लिए यदि जेल भी जाना पड़े तो वे पीछे नहीं हटेंगे।
