“संगीत केवल धुन नहीं, व्यक्तित्व को निखारने की एक सुंदर यात्रा है” : दीपेन्द्र कांत
- एमरोल्ड इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित हुई “निःशुल्क संगीत जागरूकता एवं इंटरैक्टिव कार्यशाला”
फरीदाबाद। सेक्टर-31, ग्रेटर फरीदाबाद स्थित Emerald International School में विद्यार्थियों के लिए “निःशुल्क संगीत जागरूकता एवं इंटरैक्टिव कार्यशाला” का उत्साहपूर्ण एवं सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र, ग्रेटर फरीदाबाद के सहयोग से आयोजित की गई।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा से परिचित कराना, संगीत के प्रति रुचि एवं जागरूकता विकसित करना तथा उनकी रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करना था। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने संगीत को केवल सुनने ही नहीं, बल्कि समझने, महसूस करने और अनुभव करने का अवसर प्राप्त किया।
कार्यशाला में ताल एवं लय के विभिन्न पहलुओं पर विशेष रूप से जानकारी दी गई। आशु शर्मा जी ने विद्यार्थियों को ताल की बारीकियों, लय की समझ तथा ताल के व्यावहारिक पक्ष से अवगत कराया। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से ताल को सरल एवं रोचक ढंग से समझाया।
वहीं गिटार वादन के क्षेत्र में वैभव आहूजा जी ने विद्यार्थियों को गिटार पर Chords कैसे Play किए जाते हैं, इसकी प्रारंभिक जानकारी दी। विद्यार्थियों ने गिटार के प्रति विशेष उत्साह दिखाया और वाद्य यंत्र को करीब से समझने का अवसर प्राप्त किया।
कार्यशाला का विशेष आकर्षण उस समय रहा जब दीपेंद्र कान्त ने पियानो पर अपनी शानदार प्रस्तुति दी। उनकी मधुर एवं प्रभावशाली प्रस्तुति ने विद्यार्थियों और उपस्थित सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पियानो की सुरमयी धुनों ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को स्वर, ताल, लय, भारतीय शास्त्रीय संगीत, वाद्य यंत्रों, नियमित रियाज़ के महत्व तथा संगीत के व्यक्तित्व विकास पर प्रभाव जैसे विभिन्न विषयों की जानकारी दी गई। साथ ही संगीत के माध्यम से एकाग्रता, आत्मविश्वास, अनुशासन एवं रचनात्मकता को विकसित करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
विद्यार्थियों ने कार्यशाला में अत्यंत उत्साह एवं सक्रियता के साथ भाग लिया। संवादात्मक गतिविधियों, संगीत प्रस्तुति और वाद्य यंत्रों की जानकारी ने इस कार्यशाला को विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक होने के साथ-साथ मनोरंजक भी बना दिया।
विद्यालय प्रबंधन एवं शिक्षकों ने सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि संगीत विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस प्रकार की गतिविधियाँ बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करती हैं।
सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र द्वारा विद्यालयों में इस प्रकार की निःशुल्क संगीत जागरूकता एवं इंटरैक्टिव कार्यशालाओं का आयोजन निरंतर किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा से जुड़ सकें और अपनी छिपी हुई प्रतिभा को पहचान सकें। यदि आप भी अपने बच्चों के लिए वर्कशाप आयोजित करवाना चाहते हैं तो निम्नांकित 87004 84455 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं ।
