राहत से ज्यादा आफत बनी बरसात! जनजीवन हुआ पूरी तरह से अस्त-व्यस्त
फरीदाबाद। शहर में रविवार से शुरु हुई बरसात का सिलसिला बुधवार भी जारी रहा। आज सुबह से ही रुक-रुककर शुरु हुई बरसात पूरा दिन जारी। इस बरसात के चलते जहां तापमान में भारी कमी आई वहीं लोगों को गर्मी से भी राहत मिली। हालांकि बरसात के चलते लोगों को जलभराव की समस्या से भी दो चार होना पड़ा। खासकर दोपहिया व चौपहिया वाहन चालकों को सडक़ों पर भरे बरसात के पानी से गुजरने में खासी समस्याओं से जूझना पड़ा। वहीं नौकरीपेशा लोगों और स्कूली बच्चों को भी बरसात के चलते खासी परेशानियां पेश आई।
नगर निगम प्रशासन बेशक मानसून की बरसात से पहले हर वर्ष जलनिकासी व साफ सफाई के बड़े-बड़े दावे करता है और एक ही बरसात में वह दावे पूरी तरह से धुल जाते है और इस बार भी यही नजर आया। पॉश सेक्टर हो या कालोनी, स्लम हो या फिर वीआईपी एरिया हर जगह जलभराव नजर आया। सडक़ों पर पानी जमा होने के कारण सडक़ों पर यातायात कछुआ गति से चलता नजर आया। सेक्टरर्स, बल्लभगढ़ व एनआईटी क्षेत्र में जगह-जगह जलभराव के चलते लोगों को जूझना पड़ा। मिनटों का सफर घण्टों में करने को मजबूर होना पड़ा। शहर के बाजारों एनआईटी, बल्लभगढ़, ओल्ड फरीदाबाद सहित अन्य जगहों पर भी पानी भरने के चलते लोग परेशान नजर आए। कहने को बरसात ने बेशक लोगों को गर्मी से राहत दी, लेकिन जन जीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त कर दिया।
लोगों का कहना है कि नगर निगम हर वर्ष मानसून में होने वाले जलभराव से निपटने के लिए करोडों रुपए साफ सफाई में खर्च करता है, लेकिन एक ही बरसात नगर निगम के सभी कार्याे पर पानी फेर देती है। उनका कहना है कि बेशक सरकार ने बड़े बड़े विभाग बनाकर इंजीनियर बिठा रखे हो, लेकिन सुगम जलनिकासी की व्यवस्था आज तक नही हो पाई है। आखिरकार शहर में ऐसी क्या व्यवस्था की कमी है जो एक ही बरसात से स्मार्ट सिटी के विकास की पोल खुल जाती है। लोगों का कहना है कि अगर यहां मुंबई की तरह चार-पांच दिन लगातार तेज बारिश हो गई तो यहां बाढ़ की स्थिति बन जाएगी। निगम अधिकारियों को मुंबई नगर निगम से सीख लेनी चाहिए और जलनिकासी की व्यवस्था कैसे सुदृढ़ की जाए, इस पर काम करना चाहिए।
