एकॉर्ड अस्पताल के विशेषज्ञ ने दी नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह

फरीदाबाद। भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव और बिगड़ती जीवनशैली के बीच उच्च रक्तचाप अब तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर एकॉर्ड अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. ऋषि गुप्ता ने चेतावनी देते हुए कहा कि हाइपरटेंशन स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण बन चुका है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में हर महीने हार्ट अटैक के करीब 40 से 50 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की होती है जिनका ब्लड प्रेशर लंबे समय तक अनियंत्रित रहता है। समय रहते जांच और जीवनशैली में सुधार नहीं होने पर यह समस्या जानलेवा साबित हो सकती है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि अधिकतर लोगों को लंबे समय तक यह पता ही नहीं चलता कि उन्हें उच्च रक्तचाप की बीमारी है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण सामान्य होते हैं।

इसी वजह से इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। यदि समय रहते इसकी पहचान और उपचार न किया जाए तो यह हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी रोग और आंखों की समस्याओं का कारण बन सकता है। उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के मामलों में बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की होती है, जिनका ब्लड प्रेशर लंबे समय तक अनियंत्रित रहता है। लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।डॉ. गुप्ता ने लोगों से नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराने, संतुलित आहार लेने, नमक और तैलीय भोजन कम करने, धूम्रपान व शराब से दूरी बनाने तथा रोजाना व्यायाम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और जीवनशैली में सुधार करके हाइपरटेंशन को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है।

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