जर्जर एवं असुरक्षित भवनों पर नगर निगम का कड़ा एक्शन, वार्डवार सर्वे से चिन्हित होंगे खतरनाक भवन

फरीदाबाद। नगर निगम फरीदाबाद ने शहर में जर्जर, पुराने, परित्यक्त और असुरक्षित भवनों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। नगर निगम आयुक्त यशेंद्र सिंह के निर्देश पर शहर में वार्डवार सर्वे कराया जाएगा। इस दौरान ऐसे भवनों और संरचनाओं की पहचान की जाएगी, जिनसे जान-माल को खतरा हो सकता है।

सर्वे के दौरान आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, संस्थागत, धार्मिक और सरकारी भवनों के अलावा खाली एवं परित्यक्त भवनों को भी जांच के दायरे में रखा जाएगा। बाउंड्री वॉल, बालकनी, छज्जे, पैरापेट, सीढ़ियां, पानी की टंकियां, होर्डिंग, टेलीकॉम टावर, शेड और बेसमेंट की स्थिति भी जांची जाएगी।

प्रत्येक ज्वाइंट कमिश्नर अपने क्षेत्र में डिविजनल एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, एई, जेई और संबंधित कर्मचारियों की सहायता से सर्वे कर असुरक्षित भवनों की सूची तैयार करेंगे। भवनों को खतरे के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। श्रेणी-1 में तत्काल गिरने के खतरे वाले भवन शामिल होंगे। ऐसे भवनों को खाली कराकर सुरक्षित करने या आवश्यकतानुसार ध्वस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। श्रेणी-2 में बड़े स्तर पर संरचनात्मक मरम्मत की जरूरत वाले भवन रखे जाएंगे, जबकि श्रेणी-3 में मामूली मरम्मत वाले भवन शामिल होंगे।

सर्वे में असुरक्षित पाए गए भवनों के मालिक और कब्जाधारियों को हरियाणा नगर निगम अधिनियम की धारा 265 के तहत पहचान के सात दिन के भीतर नोटिस दिया जाएगा। तत्काल खतरे की स्थिति में मौके पर बैरिकेडिंग कर लोगों को चेतावनी दी जाएगी और धारा 266 के तहत भवन खाली कराने की कार्रवाई की जा सकेगी। यदि भवन मालिक सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरतता है तो नगर निगम स्वयं भवन को सुरक्षित कराने या ध्वस्त करने की कार्रवाई कर सकता है। इस पर आने वाला खर्च संबंधित मालिक से वसूला जाएगा।

नगर निगम ने 30 वर्ष से अधिक पुराने भवनों तथा श्रेणी-2 और श्रेणी-3 में आने वाले भवनों के मालिकों को योग्य स्ट्रक्चरल इंजीनियर से स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट लेने के निर्देश दिए हैं। यह प्रमाणपत्र 30 दिनों के भीतर नगर निगम के समक्ष जमा करना होगा।

परित्यक्त भवनों को लॉक करने और चारदीवारी से सुरक्षित रखने के साथ वहां चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। निगम ने स्पष्ट किया कि भवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी मालिकों, कब्जाधारियों, बिल्डरों, ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों की होगी।

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