4 साल बाद फरीदाबाद में मिली झारखंड की नाबालिग:मामा के साथ रहने आई थी

फरीदाबाद में एक तरफ सिस्टम की लापरवाही और मजबूरी की तस्वीर सामने आई, तो दूसरी तरफ पुलिस का संवेदनशील और मानवीय चेहरा भी देखने को मिला। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले की रहने वाली 16 वर्षीय नाबालिग लड़की करीब 4 साल पहले अपने मामा के साथ फरीदाबाद आई थी, लेकिन भीड़भाड़ के बीच वह अपनों से बिछड़ गई।

गरीबी, अशिक्षा और कानून की जानकारी न होने के कारण माता-पिता अपनी बेटी की गुमशुदगी तक दर्ज नहीं करा सके। परिवार सालों तक दर-दर भटकता रहा, लेकिन बेटी का कोई सुराग नहीं मिला।

नाबालिग फरीदाबाद के एक चाइल्ड शेल्टर होम में रह रही थी। भाषा न समझ पाने के कारण वह अपना घर और परिवार तक नहीं बता पा रही थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए बाल कल्याण समिति के आग्रह पर फरीदाबाद पुलिस की किडनैपिंग एबडक्शन टीम मैदान में उतरी।

ASI अमर सिंह और सिपाही नितेश ने लगातार काउंसलिंग कर नाबालिग की पहचान तलाशने का बीड़ा उठाया। पुलिस ने बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के जिलों के नाम नाबालिग के सामने बोलने शुरू किए। जैसे ही “पश्चिमी सिंहभूम” का नाम सामने आया, पुलिस को उम्मीद की बड़ी कड़ी हाथ लग गई।

इसके बाद फरीदाबाद पुलिस ने झारखंड के थानों और ग्राम प्रधानों से संपर्क साधा। आखिरकार ग्राम प्रधान के जरिए यह पुष्टि हुई कि अक्टूबर 2022 में गांव की एक नाबालिग अचानक लापता हुई थी। जब पुलिस ने वीडियो कॉल के जरिए परिवार को उनकी बेटी दिखाई, तो 4 साल का दर्द आंसुओं में बह निकला। माता-पिता अपनी बेटी को जिंदा और सुरक्षित देखकर फूट-फूटकर रो पड़े।

23 मई को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद नाबालिग को उसके परिवार के हवाले कर दिया गया। इस पूरे ऑपरेशन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अगर पुलिस संवेदनशीलता और ईमानदारी से काम करे, तो बिछड़े परिवारों को भी फिर से मिलाया जा सकता है।

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