शिक्षा निदेशक के इस आदेश को नहीं मान रहे स्कूल मुखिया: 

जिन बच्चों के पास नहीं है आधार कार्ड व पीपीपी,उनको भी दिया जाए दाखिला - मंच की डीईओ से मांग : सरकारी स्कूलों में सभी बच्चों को मिले दाखिला

फरीदाबाद । नये शिक्षा सत्र में सरकारी स्कूलों में दाखिला बढ़ाने के लिए हरियाणा सरकार प्रवेश उत्सव मना रही है। स्कूलों के मुखिया,अध्यापक गली-गली खासकर झुग्गी,झोपड़ी स्लम बस्ती में जाकर उन बच्चों को खोज रहे हैं जो स्कूल में पढ़ाई करने नहीं जा रहे हैं। उनके पेरेंट्स से अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराने का आग्रह किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री महिपाल ठांडा ने भी सार्वजनिक रूप से कहा है कि सरकारी स्कूलों में ड्रॉप आउट दर को रोकने और नये शिक्षा सत्र में अधिक से अधिक बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराने का प्रयास किया जा रहा है।
हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने इस पहल का स्वागत किया है। मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा व प्रदेश संरक्षक सुभाष लांबा ने कहा है कि मंच भी अपने स्तर पर सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। मंच ने कहा है कि कुछ स्कूल मुखिया इस सराहनीय प्रयास में रोड़ा अटका रहे हैं। मंच के प्रदेश लीगल एडवाइजर एडवोकेट बीएस विरदी ने कहा है कि झुग्गी,झोपड़ी,स्लम बस्ती ईंट-भट्ठों में रहने वाले पैंरेंटस व कई प्रवासी मजदूरों ने मंच कार्यालय पर आकर बताया है कि उनके बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला कराने में काफी परेशानी हो रही है। उनके पास बच्चों का आधार कार्ड व परिवार पहचान पत्र नहीं है इस वजह से स्कूल मुखिया उनके बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में नहीं कर रहे हैं।
मंच ने कहा है कि यह शिक्षा निदेशक हरियाणा के आदेश,शिक्षा अधिकार कानून व उच्चतम न्यायालय के एक फैसले की अवलेहना है। मंच ने कहा है कि शिक्षा निदेशक ने 18 अप्रैल 2024 को एक आदेश पत्र निकालकर सभी जिला शिक्षा अधिकारी व जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी से कहा था कि आरटीई एक्ट 2009 की अनुपालना में सरकारी स्कूल में दाखिले की इच्छा रखने वाले छात्रों को तुरंत दाखिला दिया जाए,चाहे उनके पास आधार कार्ड व परिवार पहचान पत्र ना हो। ऐसे विद्यार्थियों का डाटा एमआइएस पोर्टल पर अलग से अपलोड किया जाए।
अगर जन्म प्रमाणपत्र नहीं है तो आंगनबाड़ी का रिकॉर्ड, अस्पताल या नर्स व दाई के रजिस्टर का रिकॉर्ड भी मान्य होगा। अगर यह रिकार्ड भी उपलब्ध नहीं है तो माता-पिता द्वारा बच्चे की आयु को लेकर दिए जाने वाला शपथपत्र मान्य होगा। मंच के राष्ट्रीय सलाहकार व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने भी कहा है कि शिक्षा अधिकार कानून के तहत किसी भी बच्चे को दाखिला देने से मना नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट की एक संवैधानिक पीठ ने भी 26.09.2018 को फैसला दिया था कि दाखिला के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है।
मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने चेयरमैन FFRC
कम मंडल कमिश्नर,जिला शिक्षा व मौलिक अधिकारी से मांग की है कि सरकारी स्कूलों के मुखियाओं को यह स्पष्ट आदेश दिए जाएं कि वे उन बच्चों को भी दाखिला दें जिनके पास आधार कार्ड व पहचान पत्र नहीं है। जो मुखिया इस आदेश की अवहेलना करे उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। एडवोकेट बीएस विरदी ने कहा है कि जिन बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला नहीं मिल रहा है उनके पैरेंट्स मंच के जिला कार्यालय चेंबर नंबर 383 जिला कोर्ट में अपनी शिकायत दर्ज करायें, उनकी हर संभव मदद की जाएगी।
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