माता कात्यायनी की पूजा में साधना, संयम और आत्मबल की कामना
नवरात्रि के छठे दिन भक्त पुकारे, मां कात्यायनी सब कष्ट निवारे
फरीदाबाद।…या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। के भाव से नवरात्रि उत्सव के छठवें दिन सूरजकुंड मार्ग स्थित श्रीलक्ष्मी नारायण दिव्यधाम-श्रीसिद्धदाता आश्रम में चल रहे आदिशक्ति मां दुर्गा के विशेष अनुष्ठान में पहुंचे श्रद्धालुओं ने आदिशक्ति मां दुर्गा के षष्टम स्वरुप माता कात्यायनी की पूजा-अर्चना की। स्वामी सुदर्शनाचार्य वेद वेदांग संस्कृत महाविद्यालय के विद्यार्थियों और आचार्यो द्वारा किए गए देवी पुराण महाभागवत के मंत्रोच्चार के साथ युवाचार्य स्वामी अनिरुद्धाचार्य जी ने विश्व कल्याण की विशेष-पूजा-अर्चना की।
आयोजित अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने धर्म, अर्थ व मोक्ष पाने और संतान की उन्नति के लिए के लिए माता कात्यायनी की विशेष पूजा-अर्चना की। श्रीसिद्धदाता आश्रम के अधिष्ठाता एवं श्रीरामानुज संप्रदाय की तीर्थ पीठ इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा के पीठाधीश्वर अनंतश्री विभूषित श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीपुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने विशेष पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को अपने प्रवचन में आदिशक्ति मां दुर्गा के षष्टम स्वरुप माता कात्यायनी की कथा में प्रस्तुत किया कि ऋषि कात्य के गोत्र में महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए। कठिन तपस्या के बाद उनके घर में मां भगवती ने पुत्री के रूप में जन्म लिया।
इसलिए मां का नाम कात्यायनी पड़ा। मां का यह रूप बेहद सरस, सौम्य और मोहक है। इनकी साधना से साधक का मन विशुद्ध चक्र में रहता है। दानव महिषासुर के विनाश के लिए भगवान ब्रह्मा विष्णू महेश ने अपना अंश देकर देवी को उत्पन्न किया। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी आदिशक्ति की मनोहर छवि दिव्य शक्ति के समान पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त है। एक अन्य कथानुसार भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं देवी की पूजा कालिन्दी-यमुना के तट पर की थी। ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। इस मौके पर स्वामी जी ने भक्तो को आशीर्वाद और प्रसाद वितरित किया।
