लोक कलाकार हरियाणवी पारंपरिक संस्कृति से पर्यटकों को करवा रहे रूबरू

बीन की धुन महिलाओं, बच्चों और युवाओं को थिरकने को कर रही विवश*

फरीदाबाद। 39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प महोत्सव-2026 में हरियाणवी लोक कलाकार अपनी बीन और बाजे की मधुर धुन और थाप से देश-विदेश से आए पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। मेले परिसर में गूंजती बीन की सुमधुर धुन और ढोलक-नगाड़ों की ताल ने मेला परिसर के वातावरण को जीवंत और उल्लासपूर्ण बना दिया है। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से हरियाणा की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की झलक पेश कर रहे हैं। सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला में आने वाले महिलाएं, बच्चे और युवा बीन की लहराती धुन सुनते ही थिरकने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं।

लोक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों के साथ कलाकार पर्यटकों को भी अपने साथ नृत्य करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं, जिससे पूरा मेला परिसर उत्साह और ऊर्जा से भर हुआ है। पर्यटक न केवल इन प्रस्तुतियों का आनंद ले रहे हैं, बल्कि कलाकारों के साथ संवाद कर हरियाणवी लोक जीवन, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी भी प्राप्त कर रहे हैं। सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प महोत्सव न केवल हस्तशिल्प और हस्तकरघा उत्पादों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह लोक कला और सांस्कृतिक विविधता का भी अद्भुत संगम है। बीन और बाजे की गूंज से आगंतुकों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन रही है।

महोत्सव में हरियाणवी रागनियों, घूमर, फाग और अन्य पारंपरिक लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। कलाकारों का कहना है कि सूरजकुंड मेला उन्हें अपनी कला को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का सुअवसर प्रदान करता है। वहीं, पर्यटक भी हरियाणा की लोक संस्कृति से रूबरू होकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
सूरजकुंड मेला परिसर में हरियाणवी लोक कलाकारों की बीन-बाजे की धुन और थाप पर थिरकते पर्यटक।

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