मानव रचना विश्वविद्यालय और दक्ष फाउंडेशन ने ‘एजिंग इंडिया’ पर किया राष्ट्रीय मंथन

फरीदाबाद। भारत एक ऐतिहासिक जनसांख्यिकीय बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। अनुमान है कि 2036 तक देश में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 230 मिलियन (23 करोड़) और 2050 तक 320 मिलियन को पार कर जाएगी। इस उभरती चुनौती को देखते हुए मानव रचना विश्वविद्यालय और दक्ष फाउंडेशन ने शनिवार को ‘एजिंग इंडिया: उभरती चुनौतियाँ और समावेशी समाधान’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि हरियाणा सरकार के राज्य मंत्री राजेश नागर ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक हमारे समाज की नींव हैं। उन्होंने उनके अनुभव और ज्ञान को समाज की दिशा तय करने वाला बताया। श्री नागर ने जोर दिया कि बुजुर्गों का कल्याण केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि शासन की रणनीतिक प्राथमिकता होनी चाहिए।

भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव हनीफ कुरैशी (आईपीएस) ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक मूल्यों के भंडार हैं। नई पीढ़ी को उनके मार्गदर्शन की उतनी ही जरूरत है, जितनी बुजुर्गों को सुरक्षा की। उन्होंने ऐसे ढांचों की आवश्यकता जताई जहाँ बुजुर्गों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
मानव रचना विश्वविद्यालय (स्कूल ऑफ लॉ) की डीन डॉ.आशा वर्मा ने सम्मेलन के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वित्तीय असुरक्षा, अकेलापन, साइबर धोखाधड़ी और संपत्ति विवाद जैसी चुनौतियाँ बुजुर्गों के लिए बड़ी बाधा हैं। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य अब ‘परोपकार’ से आगे बढ़कर ‘अधिकार-आधारित’ और जवाबदेह नीतिगत सिफारिशें तैयार करना है।

दक्ष फाउंडेशन के मुख्य सलाहकार ब्रिगेडियर एन एन माथुर ने अपनी पहल ‘ख़याल अपने बुज़ुर्गों का’ के माध्यम से नीति निर्माताओं और युवाओं को एक मंच पर लाने की बात कही। वहीं, एवीएम एल एन शर्मा ने बच्चों में बुजुर्गों के प्रति सम्मान के संस्कार विकसित करने पर बल दिया। पूर्व डीजीपी संजय कुंदू ने केंद्र सरकार की नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन और सार्वजनिक सुरक्षा पर अपने विचार साझा किए।

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