सोमनाथ भारत की संस्कृति, आस्था और स्वाभिमान का अमर प्रतीक : कृष्ण पाल गुर्जर

सैनिक कॉलोनी स्थित शिव मंदिर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ - भव्य कलश यात्रा व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से शिवमय हुआ मंदिर प्रांगण

फरीदाबाद। केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर  ने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति, आस्था, ज्ञान, शौर्य और राष्ट्रीय स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है। सोमनाथ मंदिर भारतीय सभ्यता की उस अमर चेतना का प्रतिनिधित्व करता है, जिसने अनेक आक्रमणों और संघर्षों के बावजूद अपनी पहचान, गौरव और आध्यात्मिक शक्ति को सदैव अक्षुण्ण बनाए रखा। केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने सैनिक सैनिक कॉलोनी स्थित शिव मंदिर परिसर में एक्स सैनिक सोसायटी के प्रधान राकेश धुन्ना द्वारा आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व समारोह में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।

उनके साथ बल्लभगढ़ विधायक मूलचंद शर्मा, बडख़ल विधायक धनेश अदलखा, एनआईटी विधायक सतीश फ़ागना, जिला अध्यक्ष पंकज पूजन रामपाल, जिला परिषद चेयरमैन विजय लोहिया भी मौजूद रहे। इस अवसर पर राकेश धुन्ना के संयोजन में केद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर व विधायकों का भव्य स्वागत किया गया। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत सर्वप्रथम सैनिक कॉलोनी स्थित कम्युनिटी सेंटर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं, अन्य श्रद्धालु, एवं विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं और संगठनों के प्रतिनिधियों ने बढ़चढ़ भाग लिया। कलश यात्रा सैनिक कॉलोनी के प्रमुख मार्गों से होते हुए सैनिक कॉलोनी के शिव मंदिर पहुंची।

इसके पश्चात राष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन सोमनाथ से ऑनलाइन माध्यम से में किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित किया। साथ ही मुख्यमंत्री हरियाणा नायब सिंह सैनी कुरुक्षेत्र से लाइव जुड़ें। केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि सोमनाथ को हमारे शास्त्रों में प्रथम ज्योतिर्लिंग का स्थान प्राप्त है। यह केवल श्रद्धा का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और राष्ट्रीय चेतना का जीवन प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि इस मंदिर को कई बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार भारत की जनता ने इसे और अधिक भव्य स्वरूप में पुनर्निर्मित किया।

यह हमारे आत्मविश्वास, राष्ट्रीय एकता और अडिग संकल्प का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। सरदार पटेल ने स्पष्ट कहा था कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण भारत के स्वाभिमान का पुनर्जागरण है। इसी संकल्प के परिणामस्वरूप 11 मई 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में सोमनाथ मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई, जो स्वतंत्र भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जन्म का प्रतीक बनी। कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कार और इतिहास से जोड़ा जाए। आधुनिकता के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहना ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है।

हमें अपनी भाषा, परंपराओं, त्योहारों और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान निकाली गई भव्य कलश यात्रा एवं विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे मंदिर प्रांगण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर भगवान शिव के जयकारों के साथ वातावरण को शिवमय कर दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों द्वारा शिव लीला की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्हें उपस्थित श्रद्धालुओं ने खूब सराहा।  इस अवसर पर उपायुक्त (डीसी) आयुष सिन्हा, बडख़ल एसडीएम त्रिलोक चंद, सीटीएम अंकित कुमार, डीआईपीआरओ मूर्ति दलाल, पार्षद सुमन बाला, हरिकिशन बिरोती, जगत सिंह भड़ाना, हरेंद्र भड़ाना, अंजू भड़ाना सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.