चीनी के बढ़ते दामों ने बिगाड़ा त्यौहारों का बजट
फरीदाबाद। त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले ही चीनी के बढ़ते दामों ने मिठास का बजट बिगाड़ दिया है। करीब 20 दिन में चीनी की कीमत में लगभग 19 रुपये प्रति किलोग्राम तक का उछाल आया है। अचानक बढ़े दामों से जहां आम उपभोक्ताओं की रसोई का बजट प्रभावित हुआ है, वहीं मिठाई और बेकरी कारोबारियों की चिंता भी बढ़ गई है। कारोबारियों का कहना है कि यदि कीमतों में इसी तरह तेजी जारी रही तो आगामी त्योहारों पर मिठाइयों के दाम बढ़ाना मजबूरी हो सकती है। थोक बाजार में चीनी के भाव बढऩे का असर अब खुदरा बाजार में भी दिखाई देने लगा है। दुकानदारों के अनुसार आपूर्ति और बाजार में बढ़ती मांग के कारण कीमतों में तेजी आई है। त्योहार नजदीक आने के साथ ही चीनी की खपत बढऩे की संभावना है, ऐसे में आने वाले दिनों में दाम और बढऩे की आशंका जताई जा रही है। जिले की आबादी 30 लाख से अधिक है और हर महीने 200 मीट्रिक टन चीनी की खपत होती है।
चीनी शुक्रवार को 63 रुपये प्रति किलोग्राम थी। जबकि 20 दिन पहले 43 से 44 रुपये प्रति किलोग्राम कीमत थी। अब त्योहारों में हलवाई मिठाई के लिए चीनी महंगी खरीदंगे तो मिठाई भी महंगी होगी। आम आदमी के लिए टी-स्टाल पर मिलने वाली चाय के कप की कीमत 10 से 15 रुपये होने की आशंका है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार हर महीने प्रति व्यक्ति डेढ़ किलोग्राम चीनी दी जाती है। जिन बड़े परिवारों में हर महीने में 40 से 50 किलोग्राम चीनी खर्च होती है, उनकी रसोई का खर्च हजारों में बढ़ गया है। अब आम व्यक्ति न तो चीनी आसानी से खा सकता है और न ही गुड़। लोगों का कहना है कि जब गन्ना ज्यादा एथनाल में चला जाएगा तो ऐसी स्थिति में गुड़ भी कम मात्रा में बनेगा, जो काफी महंगा होगा। चीनी के थोक विक्रेता सुनील कुमार का कहना है कि सरकार पूरे देश के लिए हर महीने 2.25 मिलियन टन चीनी एलोकेशन मंजूर करती है। चीनी महंगी होने से यह एलोकेशन घट जाएगी। क्योंकि रोजाना कमाने वाला व्यक्ति इतनी महंगी चीनी नहीं खा सकता।
अब सरकार ने नए निर्देश दिए हैं कि कोई भी थोक विक्रेता 15 दिन से ज्यादा का चीनी का भंडारण नहीं कर सकता। वहीं दुकानदार रवि का कहना है कि पिछले 15 वर्ष से चीनी की कीमत 42 से 44 रुपये प्रति किलोग्राम तक चलती रही। कभी एक-दो रुपये महंगी हो जाती, तो फिर एक-दो रुपये घट जाती। एक महीने से चीनी की कीमत लगातार बढ़ रह रही हैं। रामअवतार सिंगला का कहना है कि चीनी इतनी महंगी हो गई है कि पहले जहां 20 किलोग्राम एक महीने के लिए खरीदते थे, अब मुश्किल से 10 किलोग्राम खरीद पा रहे हैं। लोगों के लिए चाय बनाने के बारे में सोचना पड़ता है। लोगों का कहना है कि त्योहार शुरू हो गए हैं। इनमें चीनी भी ज्यादा खर्च होती है। त्योहारों में हलवाई से जहां मिठाई खरीदते हैं, वहीं घरों में हलवा, खीर आदि बनाने के लिए भी चीनी की जरूरत होती है। चीनी महंगी होने से त्योहारों की मिठास फीकी हो जाएगी। चीनी महंगी होने से मेरे लिए घर की रसोई का खर्च चलाना मुश्किल हो गया। पहले चीनी 42-43 रुपये प्रति किलोग्राम मिल जाती थी, अब 60 रुपये से ऊपर मिल रही है। रसोई गैस, सब्जी, सरसों का तेल महंगा हो रहा है। कैसे घर का खर्च चलाएं।
