‘राष्ट्र प्रथम संवाद’ में गूंजा सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का संदेश
राजा हसन खां मेवाती, दादा कान्हा रावत और मेवात के अमर बलिदानियों को किया नमन
पलवल। वतनपरस्त शहीद राजा हसन खां मेवाती के आगामी 500वें बलिदान दिवस तथा हिंदू वीर शिरोमणि दादा कान्हा रावत सहित मेवात के ज्ञात-अज्ञात अमर बलिदानियों की स्मृति में रविवार को एडवांस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, मिट्रोल में ‘राष्ट्र प्रथम संवाद’ का आयोजन किया गया।
वन्दे सरदार एकता पदयात्रा आयोजन समिति, सशक्त युवा फाउंडेशन एवं अखिल भारतीय शहीदाने सभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में विधायक मोहम्मद इसराइल, 52 पाल के अध्यक्ष चौधरी अरुण जैलदार, राजा हसन खां मेवाती स्मारक समिति के सदस्य राशिद मेव तथा मुख्यमंत्री के मीडिया समन्वयक मुकेश वशिष्ठ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हथीन जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अनवर ने की।
संवाद के दौरान विदेशी आक्रांता बाबर के विरुद्ध मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त करने वाले राजा हसन खां मेवाती, मुगल शासक औरंगजेब के अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष करने वाले दादा कान्हा रावत तथा मेवात के अन्य वीर बलिदानियों के शौर्य, संघर्ष और राष्ट्रनिष्ठा का स्मरण किया गया।
मुख्यमंत्री के मीडिया समन्वयक मुकेश वशिष्ठ ने कहा कि विदेशी आक्रांता भारत से केवल धन-संपदा ही लूटकर नहीं ले गए, बल्कि उन्होंने हमारी संस्कृति, विरासत, शिक्षा-व्यवस्था और राष्ट्रीय पहचान पर भी गहरी चोट पहुंचाई। हम सभी एक ही मिट्टी की संतान हैं, इस आत्मबोध को मिटाने का भरसक प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि विदेशी शक्तियों ने जाति, धर्म, रंग और भाषा के नाम पर नफरत के ऐसे बीज बोए, जो आज स्वतंत्र भारत की बड़ी चुनौतियों में से एक हैं। इस चुनौती का सामना सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और अपनी साझा विरासत के प्रति जागरूकता से ही किया जा सकता है।
विधायक मोहम्मद इसराइल ने 1857 की क्रांति के अमर बलिदानियों को नमन करते हुए कहा कि यदि हमारे क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध आवाज नहीं उठाई होती, तो आज हम स्वतंत्र भारत में उनके गौरवपूर्ण बलिदान का स्मरण नहीं कर रहे होते। उटावड़ की धरती पर सामूहिक कब्रों में दफन अमर शहीदों का बलिदान मेवात की राष्ट्रभक्ति और साहस का जीवंत प्रमाण है। इन वीरों ने मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर कर देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
राजा हसन खां मेवाती स्मारक समिति के सदस्य राशिद मेव ने कहा कि मेवात ने कभी मुगलों और अंग्रेजों की दासता स्वीकार नहीं की। मेवात का इतिहास मातृभूमि के प्रति समर्पण, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय स्वाभिमान की गौरवशाली गाथा है। इस इतिहास को सामने लाना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
52 पाल के अध्यक्ष चौधरी अरुण जैलदार ने कहा कि हमारा क्षेत्र ब्रजभूमि का अभिन्न अंग और भगवान श्रीकृष्ण तथा प्रभु श्रीराम की संस्कृति से अनुप्राणित धरती है। इस वीरभूमि ने कभी विदेशी आक्रांताओं की दासता स्वीकार नहीं की। नई पीढ़ी को राजा हसन खां मेवाती, दादा कान्हा रावत और क्षेत्र के अन्य बलिदानियों के जीवन, संघर्ष एवं योगदान से परिचित कराना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने जाति और धर्म की दीवारों से ऊपर उठकर समाज में यह भाव जागृत करने का संकल्प लिया—हम सब एक हैं, हमारी मिट्टी एक है, हमारी विरासत एक है और हमारा राष्ट्र सर्वोपरि है।
कार्यक्रम में संयोजक दामोदर भारद्वाज, सह-संयोजक डॉ. इरशाद माथेपुर, डॉ. असगर हुसैन, विशाल भारद्वाज, पुष्पेंद्र ठाकुर, फरहीन राजपूत, राशिद कुरैशी, हाफिज इमरान, दीपक शर्मा, सागर डागर, कृष्ण लाडियाका, महेश गौड़, अधिवक्ता पवन शर्मा, मनोज सरपंच, जफरुद्दीन, समयदीन और धन सिंह रावत सहित आयोजन समिति के सभी सदस्यों का विशेष योगदान रहा।
